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Homeअन्यकविता-ग़ज़लहोली/भोले चले ससुरारी

होली/भोले चले ससुरारी

भोले चले ससुरारी,
सुना हो भोले चले ससुरारी।
मस्ती में हैं त्रिपुरारी,
सुना हो भोले चले ससुरारी।।

फागुन महीना बहै पुरवाई,
रंगवा के बदले भभूती लगाई।
कइके नंदी सवारी **
सुना हो भोलै चले ससुरारी।।१।।

नाचै डइनियां व भुतवा परेतवा,
झूमैन संग मे शिवजी क दुतवा।
गावैन भरिके हुंकारी**
सुना हो भोले चले ससुरारी।।२।।

पहुंचे बराती हिमाचल दुआरे,
प्रभु के सतीजी मगन हो निहारें।
साथे में मैना मतारी**
सुना हो भोले चले ससुरारी।।३।।

अपने चढाये धतूर क गोला,
रसिया बोलैन बम बम भोला।
पागल भये नर नारी**
सुना हो भोलै चले ससुरारी।।४।।

गीतकार -रसियाकुमार

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