मुंबई (सं. भा.)। गोरेगांव इन दिनों जुआरियों का अड्डा बना है। इन अड्डो पर स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि दूर-दूर से जुआरी जुआ खेलने पहुँचते हैं। जुआ खेल कर मालामाल होने का सपना देख यहां आनेवाले ज्यादा लोग कंगाल हो कर ही जाते हैं। लोगों को कंगाल कर जुए का अड्डा चलाने वाले खुद मालामाल होते हैं।
चौकाने वाली बात यह है कि जुए का अड्डा चलाने वालों के खिलाफ गोरेगांव पुलिस कोई ठोस कार्रवाई करती नजर नही आ रही है। जुओंके अड्डों पर कड़ी नजर रखने की जगह पुलिस बीट ऑफिसर अपनी आंख बंद किए बैठे दिखाई देते हैं। यही कारण है कि इन दिनों गोरेगांव जुआ खेलने के अड्डों का गढ़ गया है ।
गौरतलब है कि गोरेगांव पश्चिम के मोतीलाल नगर में सत्तार और जॉन जुए का अड्डा चला रहे थे। ‘संगठन भारत’ में उनके खिलाफ जब खबर छपी तो उन दोनो ने अपना अड्डा बदल दिया। इन दिनो दोनो प्रेमनगर झोपड़पट्टी में अपना जुए का अड्डा चला रहे हैं। ऐसी खबर ‘संगठन भारत’ को प्राप्त हुई है। उन दोनो के नए अड्डे की जानकारी मालाड डिविजन के सहायक पुलिस आयुक्त दीपक फटांगरे को भी दाr गई। उन्होंने कार्रवाई का अश्वासन देने के बजाए कहने लगे की पूरा पता बताओं तो फिर मैं कुछ करुंगा। मुंबई पुलिस के इतने अहम पद पर बैठा अधिकारी से शायद ही ऐसे जवाब की अपेक्षा कोई रखता है।


