मुंबई (सं. भा.) : महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को लेकर जारी बहस के बीच भाजपा के पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी ने स्पष्ट किया कि हिंदी भारत की वैश्विक पहचान है और इसका विरोध करना उचित नहीं है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि जब हम विदेशों में हिंदी बोलते हैं, तो वहां के लोग तुरंत पहचान लेते हैं कि हम भारत से हैं। पूरी दुनिया में हिंदी भाषा को भारत की पहचान के रूप में देखा जाता है।

शेट्टी ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले से ही ‘लोकल फॉर वोकल’ की बात करते आए हैं और यह भी स्पष्ट किया है कि हर राज्य की भाषा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। महाराष्ट्र में मराठी भाषा को सर्वप्रथम स्थान दिया जाता है, इसके बाद हिंदी को प्राथमिकता मिलती है। वहीं, अंग्रेज़ी एक वैश्विक भाषा है, जो व्यापार के दृष्टिकोण से उपयोगी है। यह किसी से छिपा नहीं है। लेकिन जब हम विदेश जाते हैं और हिंदी बोलते हैं, तो लोग तुरंत पहचान जाते हैं कि हम भारत से हैं। संपूर्ण विश्व में हिंदी हमारी सांस्कृतिक और भाषाई पहचान है। इसलिए मैं पूरे महाराष्ट्र के लोगों से निवेदन करता हूं कि वे हिंदी भाषा का विरोध न करें।
शेट्टी ने छत्रपति शिवाजी महाराज को याद करते हुए कहा कि उनके राज्याभिषेक के लिए उत्तर भारत से विद्वान पंडित गगाभट्ट को आमंत्रित किया गया था। उन्हें इसलिए नहीं बुलाया गया था क्योंकि महाराष्ट्र में विद्वान ब्राह्मण नहीं थे, बल्कि इसलिए बुलाया गया था कि महाराज महाराष्ट्र को सीधे राष्ट्र से जोड़ना चाहते थे। यदि महाराष्ट्र हिंदी भाषा के साथ खड़ा हो जाए तो किसी की भी हिम्मत नहीं है कि हिंदी भाषा का विरोध कर सके। मुझे लगता है कि महाराष्ट्र के लोग भी इस बात को मानेंगे।


