25 दिन देरी से शुरु हुआ सफाई का काम
मीरा- भायंदर (सं. भा.) : मीरा – भायंदर की आबादी लगभग 15 लाख है। इन सभी के घरों के नालियों से निकलने वाला गंदा पानी यहां के 155 बड़े नालों के माध्यम से समुद्र में मिल जाता है। मानसून पूर्व इन नालों को हर वर्ष साफ करने की जिम्मेदारी मीरा- भायंदर मनपा की होती है जिससे मानसून के दौरान पानी की निकासी आसानी से हो सके और क्षेत्र में जल जमाव न हो।
मॉनसून आने में अब एक महीने का भी समय नहीं बचा है। मॉनसून के मद्देनजर मीरा-भाईंदर में नालासफाई का काम भी जोरों पर हो रहा है। आयुक्त दिलीप ढोले ने 30 मई तक शहर के सभी नालों को साफ 7 करने का अल्टीमेटम दे रखा है। इसमें लगभग दो हफ्ते का समय बचा है, लेकिन सफाई का काम अब भी काफी बाकी है।
लगभग 15 लाख की आबादी वाले मीरा-भाईंदर में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 155 नाले हैं। हर वर्ष इन नालों की सफाई पर औसतन 3 करोड़ रुपये खर्च आता है। नाला सफाई का काम विगत 1 अप्रैल से शुरू होना था, लेकिन प्रशासन और सत्ता के बीच समन्वय के अभाव में यह काम 25 दिन देरी से शुरू हुआ। इस देरी का असर मॉनसून में जरूर दिखेगा।
हालांकि अब 700-800 मजदूरों को लगाकर नाला सफाई का काम कराया जा रहा है। नवघर रोड, बीपी रोड, भाईंदर पश्चिम, रामदेव पार्क, केबिन रोड, मीरा- रोड, काशिमिरा, पेनकरपाडा, शांति नगर, नयानगर, काशिगांव इत्यादि क्षेत्रों में दर्जनों मजदूर नालासफाई करते दिख जाएंगे। हालांकि इनमें बच्चों से मजदूरी कराने की शिकायतें भी मिल रही हैं।
मलबा न उठाने की मिल रही शिकायतें पेनकरपाडा के एडवोकेट राकेश शुक्ला कहते हैं कि उनके यहां नाले से निकला मलबा पूरी तरह से सूख से गया है, लेकिन उसे अब तक उठाया नहीं गया है। कुछ ऐसा ही हाल बीपी रोड के औद्योगिक क्षेत्रों और नवघर रोड के आंतरिक हिस्सों में दिखा। कई जगहों पर मलबा 5-6 दिन से पड़ा हुआ है।
” नालासफाई का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। यह तय समय सीमा में पूरा कर लिया जाएगा। प्रतिदिन नालासफाई के काम का जायजा लिया जा रहा है। -दिलीप ढोले, आयुक्त, एमबीएमसी


