भायंदर (सं. भा.) : अंजलि जैन आज किसी परिचय का मोहताज नही है। उसको नाम और प्रसिद्धी दिलाई है उसकी कविता लेखन के प्रति गहरी रुचि ने।
‘चलो फिर से बच्चे बन जाते हैं, जहां ना समझ थी ना समझना, जहां मन की मनमानियां चला करती थीं, जहां सिर्फ चोकी (चॉकलेट) से मान जाया करते थे’। इन लाइनों से अपने कविता लेखनी की शुरुआत करनेवाली भायंदर की अंजलि जैन ने इतने बड़े मुकाम का सोचा नहीं था, जिसकी लिखी कविताओं को वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिलेगा। बता दें कि भायंदर की रहनेवाली अंजलि जैन ने मुंबई के सराफ कॉलेज से बैफ की डिग्री हासिल की, लेकिन उसे बहुत पहले से कविताएं लिखने में रुचि रही। अंजलि ने चार भाषाओं में कविताओं की किताब ‘इंकिंग इमोशन’ नाम से लिखी, जिसे वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला है। साथ ही ग्लोरियस बुक ऑफ रिकॉर्ड और इंकजोइड बुक ऑफ रिकार्ड्स से उन्हें सम्मानित किया गया है। अंजलि पिछले तीन सालों में उन्होंने ११० से ज्यादा कविताएं लिख चुकी हैं, जिनमें से १०१ कविताओं को वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला है।


