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लोकगीत

 

चारों ओर फईलल बा लव क बिमरिया,

बतावा कइसे बीती राम बाकी उमिरिया।

 

बानी सन्यासी हमके लव से एलर्जी,

लोगवा  कहैंन  येसे आवेला एनर्जी।

कइसे बचाई जान लागल फिकिरिया*

बतावा कइसे बीती राम बाकी उमिरिया।

 

जिनगी में रस नईखे नीरस देखाला,

प्यार क चारों ओरी बाटै बोलबाला।

डगमग पांव पडै चलत क डगरिया*

बतावा कइसे बीती राम बाकी उमिरिया।

 

.नये नये लइकन के लागेला इ खेला,

अउरी  पुरनिया के  प्यार बा झमेला।

तनिका उठाके देखा आपन नजरिया*

बतावा कइसे बीती राम बाकी उमिरिया।

 

गीतकार* रसियाकुमार

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