spot_img

लोकगीत

सपना काहें खातिर दू दिन से गुसिआइल बाडू.

                       हमरा से रिसिआइल बाडू ना।

काहें घसिया के ना जालू,

बइठल छोलत  बाटू आलू।

लागत बा गउंवा में कउनौ से अरुझाइल बाडू.

                 हमरा से रिसिआइल बाडू ना।।१।।

तोहरे बिन कइसे अब जीई,

घुट घुट जहर  जुदाई पीई।

लागत एकदिन जइसे चिरई तू शरमाइल बाडू,

                हमरा से रिसिआइल बाडू ना।।२।।

तनिका एहरो नजर घुमावा,

अपने आशिक के अपनावा।

हम त रसिया बानी काहे बदे भुलाइल बाडू,

             हमरा से रिसिआइल बाडू ना।।३।।

                  गीतकार: रसियाकुमार

RELATED ARTICLES

Most Popular

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com