प्रगति का मतलब यह नहीं कि देश में गैर कानूनी कार्य किये जाये, बल्कि यह है कि संविधान के वर्णित नियमों एवं दिशा निर्देशों के तहत कार्य किया जाय। विशेष कर महानगर मुंबई में आजादी के बाद से ही गैर कानूनी धंधे व मुहल्ले विकसित होते रहे हैं। हलांकि अवैध धंधों पर अंग्रेजी सरकार भी रोक नहीं लगा पाई थी, किंतु स्वदेशी सरकारों एवं स्थानीय निकायों ने अवैध निर्माणों व गैर कानूनी धंधों की जैसे छूट दे रखी हो। किंतु किसी भी सरकार ने महानगर को विधिवत् विकसित किये जाने के बारे में सोचा भी नही। जिस सरकार ने सोचा भी तो गैर कानूनी तरीकों से विकसित होते शहर को सुनियोजित विकसित कराने में किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं कर पाये, लिहाजा महानगर मुंबई में अनेक गैर कानूनी कार्य विकसित होते रहे हैं। इसका कारण शहर के हर क्षेत्र में पनपता भ्रष्टाचार रहा है।
महानगर मुंबई की नागरिक सुविधा प्रदाता बृहन्मुंबई महानगर पालिका (मनपा) रही है, जिसके समस्त ढांचे में भ्रष्टाचार इतना घुस गया है, कि आम नागरिको को सुविधायें प्रदान करने वाली मनपा ही असुविधाओंका प्रमुख कारण बन गई है। महानगर मुंबई की आबादी तेजी के साथ बढ़ी है और बढ़ती भी जा रही है, किंतु इसे नगरीय विकास नहीं कहा जा सकता। बढ़ती हुई आबादी को सुनियोजित ढंग से बसाना ही विकास है। महानगर पालिका की एक शाखा गठित कर दी गई थी एस आर ए (झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण), जो कि भ्रष्टाचार का प्रमुख अड्डा बन चुका है। जिन झोपड़पट्टियों को उक्त पुनर्वसन की विधा में लिया जाता है, उसमें आधे के लगभग झोपड़ाधारकों को अपात्र घोषित कर दिया जाता है एवं मनपा, एस आर ए तथा बिल्डर अपात्र घोषित झोपड़ा धारकों के पÌलैटों की खुलेआम कालाबाजारी करते हैं। पहले तो मनपा अधिकारी अपनी अतिरिक्त कमाई करते हैं। कई बार उन झोपड़ों को अनधिकृत बताकर भी तोड़क कार्रवाई की दहशत फैला कर पुन: दूसरी बार अतिरिक्त कमाई करते हैं। उस झोपड़पट्टी को जब एस आर ए द्वारा विकसित करने को प्रस्तावित किया जाता है, तब मनपा व एस आरए के अधिकारियों की तीसरी बार कमाई शुरु हो जाती है। पात्रों को अपात्र ठहरा कर और अपात्रों के हक के घरों को पूंजीपतियों को कालाबाजारी के नाम पर बेंचकर।
मनपा के अधिकारियों की काली कमाई की आदत उन्हें अन्याय पूर्ण तरीके से झोपड़ा धारकों को पात्र-अपात्र घोषित करने की रही है। झोपड़ा धारक प्राय: गरीब मजदूर, नौकरी यापÌता या फेरीवाले होते हैं। जो मनपा व एस आर ए के अन्यायपूर्ण व अनैतिक कार्यो का विरोध नहीं कर पाते हैं। यदि कोई झोपड़ाधारक अपनी लड़ाई जारी रखता है तो उक्त झोपड़पट्टी के विकास का कार्य लेने वाला ठेकेदार बिल्डर अपने गुंडों से धमकाकर या कुछ प्रलोभन देकर उसकी आवाज को दबा देता है। इस तरह एसआरए योजना में घटिया निर्माण करने एवं पÌलैटों की कालाबाजारी का चलन आम हो गया है। इस तरह नित नई-नई नागरिक सुविधाओंकी समस्याएं उठती रही हैं और महानगर मुंबई में कंकरीट का अवैध जंगल खड़ा होता गया है। भ्रष्ट कार्यो का प्रमाणन यह है कि मनपा में शिकायतों का अंबार लगता रहा है, जो सिर्फ मनपा द्वारा तिरस्कृत करने के लिए ही होती रही हैं।


