महारेरा ने बिल्डरों पर कसा शिकंजा
मुंबई (सं. भा.): महाराष्ट्र में अब बिल्डरों की लापरवाही और चालाकी दोनों पर लगाम कसने की तैयारी है। रियल एस्टेट मामलों में मुआवजा तय होने के बावजूद रकम न मिलने से खफा अदालत ने हाल ही में महारेरा को फटकार लगाई थी। इसी के बाद महारेरा ने कड़ा कदम उठाते हुए बिल्डरों के लिए नई गाइडलाइंस लागू कर दी है। इसके अनुसार, अब मुआवजा आदेश जारी होने के 60 दिन के भीतर बिल्डर को अपनी चल-अचल संपत्ति और बैंक खातों की पूरी जानकारी प्रमाणित दस्तावेजों के साथ जमा करनी होगी। तय समयसीमा में यह जानकारी न देने पर सीधे तीन महीने तक की जेल हो सकती है।

अक्सर शिकायतों में सामने आया है कि जब घर खरीदारों के पक्ष में आदेश जारी होता है, तो कई बिल्डर अपनी संपत्ति वॉरंट जारी होने से पहले ही करीबियों के नाम ट्रांसफर कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि खरीदारों को नुकसान की भरपाई के लिए प्रशासन को लंबी और जटिल वसूली प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। कोर्ट ने इसी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा था कि घर खरीदने वालों की मेहनत की कमाई के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नए एसओपी के मुताबिक जब भी महारेरा किसी शिकायत पर मुआवजे का आदेश जारी करेगा, उसी दिन से 60 दिन की मोहलत शुरू हो जाएगी। इस दौरान यदि बिल्डर भरपाई की रकम जमा नहीं करता, तो उसकी घोषित संपत्तियों को कब्जे में लेकर बेचने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। और यदि बिल्डर इस पूरी प्रक्रिया से बचने के लिए संपत्ति का विवरण ही जमा नहीं करता, तो उसे सीधे कारावास का सामना करना पड़ेगा।

महारेरा का मानना है कि यह नया नियम गैरजिम्मेदार बिल्डरों के खिलाफ एक मजबूत हथियार साबित होगा। घर देने में देरी, घटिया निर्माण, पार्किंग और सुविधाओं का वादा पूरा न करने जैसी शिकायतों में खरीदार को राहत पाने के लिए अब लंबा इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। प्राधिकरण का दावा है कि इस सख्ती से वसूली आसान होगी और खरीदारों का भरोसा लौटेगा।


