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भुजबल दिखा रहे ‘बल’

  • महाराष्ट्र सरकार की बढ़ा रहे हैं टेंशन
  • कहा मराठा समाज पिछड़ा नहीं
  • बिहार की तर्ज पर जाति जनगणना की करी मांग

मुंबई (सं. भा.) : महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री और अजित पवार गुट के नेता छगन भुजबल ने मांग की है कि सरकार मराठा आरक्षण के लिए बनाई गई शिंदे समिति को रद्द करे। हिंगोली में एल्गार परिषद् की ओबीसी महासभा में भुजबल ने कहा कि जिन मराठों को कुनबी सर्टिफिकेट दिए गए हैं। सभी को रद्द किया जाए। भुजबल ने सभा में कहा कि बिहार की तर्ज पर जातिगत जनगणना कराई जाए, उसके बाद ही पता चलेगा की कौन पिछड़ा है। मराठों को पिछड़ा साबित करने वाली जस्टिस शिंदे समिति का गठन किया है।
भुजबल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि मराठा समाज पिछड़ा नहीं है, फिर यह समिति किसलिए? शिंदे समिति को किसी को भी पिछड़ा साबित करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि अकेले मराठा समाज को पिछड़ा साबित किए जाने के लिए सर्वे नहीं चलेगा। अगर सर्वे करना है, तो सभी जाति समाज, समुदाय का करना होगा। तुलनात्मक अध्ययन के बाद ही तय हो पाएगा कि कौन कितना पिछड़ा है।


भुजबल ने कहा कि मंडल आयोग के आंकड़ों में ओबीसी 54 प्रतिशत थे। बिहार में जातिगत जनगणना हुई, तो ओबीसी 64 प्रतिशत निकले। उन्होंने कहा बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले, एनसीपी नेता शरद पवार, उपमुख्यमंत्री अजित पवार, कांग्रेस नेता राहुल गांधी सभी जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं। एक बार जातिगत जनगणना करा कर देख लो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। एक बार में पता चल जाएगा कि दलित, आदिवासी और ओबीसी की ताकत कितनी है। जब बिहार जातिगत जनगणना कर सकता है, तो महाराष्ट्र क्यों नहीं करा सकता?
भुजबल ने कहा कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण में 78 प्रतिशत लाभ मराठा समाज को मिला है। एमपीएससी में मराठा समाज के लोग ए ग्रेड में 33.50%, बी ग्रेड में 29, सी ग्रेड में 37 और डी ग्रेड में 36 प्रतिशत हैं। मंत्रालय कैडर में ए ग्रेड में 37.50% बी ग्रेड में 52.30, सी ग्रेड में 52, और डी ग्रेड में 55.50 प्रतिशत हैं। वहीं आईएएस में 15.50, आईपीएस में 28 और आईएफएस में 18 प्रतिशत हैं।

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