भाजपा दक्षिण की ओर बढ़ने का जितना प्रयास कर रही है, भगवान राम पर डीएमके का हमला बढ़ता ही जा रहा है। डीएमके के इन बयानों पर प्रतिक्तिया व्यक्त करने के पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
तमिलनाडु अकेला ऐसा प्रदेश है, जहां मुस्लिम आबादी सबसे कम है. लगभग 90 प्रतिशत आबादी वहां की हिंदू है. और साढ़े 5 प्रतिशत मुसलमान तथा इतने ही ईसाई. लेकिन फिर भी वहां हिंदू धर्म के आदि-पुरुषों, प्रतीकों और परंपराओं पर खूब हमला होता रहा है. यह भी दिलचस्प है कि देश में सबसे अधिक आस्थावान हिन्दू भी तमिलनाडु में ही रहते हैं. सुबह-सुबह नंगे पांव, माथे पर चंदन लगाये स्त्री-पुरुषों की भीड़ हर मंदिर में मिल जाएगी. वहां के रीति-रिवाज और परंपराओं में हिंदू देवी-देवताओं का पूजा-पाठ इस कदर हावी है कि मुसलमान भी वहां मस्तक पर चंदन लगाकर ऑफिस जाते दिख जाएंगे. तमिल धोती (जो लुंगी की तरह पहनी जाती है) मंदिर के पुजारी भी पहनते हैं और मस्जिद के इमाम भी. अब कुछ वर्षों से कट्टर इस्लामिक लोग जरूर पाजामा पहनने लगे हैं.
यहां हिंदू प्रतीकों पर हमले की शुरुआत तमिल संस्कृति की रक्षा के रूप में शुरू हुई. अधिकतर तमिलों को लगता है कि हिंदू धर्म में जिस तरह द्विज संस्कृति और संस्कृत का प्रभाव है, वह उनकी द्रविड़ संस्कृति तथा तमिल भाषा को नष्ट कर रहा है. इसलिए 20वीं सदी की शुरुआत में ही यहां संस्कृत विरोध, ब्राह्मण विरोध और हिंदी विरोध का नारा बुलंद हुआ. जो धीरे-धीरे उत्तर के देवताओं के विरोध तक जा पहुंचा. चूंकि राम उत्तर के सबसे प्रभावशाली देवता हैं और उनका लंका विजय अभियान कहीं न कहीं दक्षिण को परास्त करने तथा वहां पर अपनी संस्कृति एवं भाषा को लादने जैसा प्रतीत होता है, इसलिए यहां राम के विरोध को बल मिला. द्रविड़ मुनेत्र कड़गम डीएमके जैसे राजनीतिक दलों ने इस अभियान को आगे बढ़ाया. कितनी दिलचस्प बात है कि राम का विरोध करने वाले वे डीएमके नेता हैं, जो हिंदू हैं और अपने नाम भी उत्तर के देवताओं की तरह धारण किए हुए हैं.
ताजा विवाद तमिलनाडु के परिवहन मंत्री एसएस शिव शंकर के उस बयान की उपज है, जिसमें उन्होंने भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाया है. उन्होंने चोल सम्राट राजराजा राजेंद्र चोल की जयंती पर हुए एक समारोह में कहा कि भगवान राम के बारे में कोई प्रामाणिक तथ्य नहीं मिलते. यदि वे भगवान थे तो उनका अवतार कैसे हुआ? उन्होंने इस तरह की विवादित बात कर डीएमके की उस परंपरा को आगे बढ़ाया है, जो पिछले कुछ महीनों से उसके नेता अपने जहर भरे बयानों से पैदा कर रहे हैं.
अभी कुछ महीने पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और प्रदेश में युवा मामलों के मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म और संस्कृति की तुलना डेंगू जैसे जानलेवा मच्छरों से की थी. उन्होंने कहा था, कि इनका जड़ से उच्छेद करना होगा. हिंदू धर्म पर डीएमके इस तरह के हमले कर किसे संतुष्ट करना चाहती है? तमिलनाडु में हिंदुओं के अलावा और कोई वोट बैंक इतना है नहीं कि उसे जीत दिला सके. इसके अलावा जिस उत्तर के धर्म के उच्छेद करने का वह आह्वान कर रही है, उसी उत्तर के बूते आज यह राज्य समृद्धि के शिखर पर है. पिछले 40 वर्षों के अंतराल में तमिलनाडु में उद्योगों और कार्पोरेट्स के लिए बुनियादी ढांचा विकसित होना शुरू हुआ. और उसकी वजह थी, केंद्र का तमिलनाडु को भरपूर सहयोग. तमिलनाडु में चाहे करुणानिधि की डीएमके सरकार रही हो या जयललिता की अन्नाद्रमुक की सरकार, सबने केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी को साधे रखा.
परंतु यह पहली बार हो रहा है कि तमिलनाडु की डीएमके सरकार और केंद्र की मोदी सरकार के बीच तीन और छह के रिश्ते हैं. इसकी एक वजह तो यह है कि तमिलनाडु प्रदेश आज समृद्धि की जिस ऊंचाई पर पहुंच गया है, उसके चलते उसे केंद्र की बैशाखी की जरूरत नहीं है. यही कारण रहा कि 2014 से 2024 तक हर चुनाव में भाजपा के सहयोग के बिना भी डीएमके लोकसभा जीतती रही. सात मई 2021 को जब से DMK के एमके स्टालिन मुख्यमंत्री बने तब से वे भाजपा के प्रति हमलावर बने और हिंदू या सनातन धर्म के प्रति भी उनका रुख विरोधी रहा. जयललिता की अन्ना द्रमुक भी द्रविड़ आंदोलन से उपजी थी किंतु जयललिता खुद में धार्मिक महिला थीं और उन्होंने हिंदू धर्म के विरुद्ध कोई सीधी जंग नहीं छेड़ी. डीएमके के करुणानिधि के समय भी विवादों से बचा जाता रहा.
लेकिन एमके स्टालिन के समय से सनातन धर्म के विरुद्ध सीधी लड़ाई छेड़ दी गई है. उदयनिधि, ए राजा और अब एसएस शिव शंकर आदि द्रमुक नेता लगातार कोई न कोई बयान देकर उत्तर के हिंदुओं को भड़काते रहते हैं. ऐसा लगता है कि इंडिया गठबंधन अब हिंदी हार्टलैंड से दूर होकर दक्षिण के लोगों को एकजुट कर रहा है. आज की तारीख में आंध्र और पुडुचेरी को छोड़कर सभी जगह इंडिया गठबंधन की सरकारें हैं. इसलिए इंडिया गठबंधन का फोकस अब दक्षिण पर है. यहां हिंदू-मुस्लिम से अधिक असर उत्तर-दक्षिण का पड़ता है. इसलिए राम को गाली दी जा रही है। .


