प्रयागराज (सं.भा.): संगम तट पर आयोजित होने वाला माघ मेला अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला एक बड़ा आर्थिक केंद्र बनता जा रहा है। श्रद्धालुओं की भारी आमद से व्यापार, परिवहन और सेवाक्षेत्र में व्यापक गतिविधियां देखने को मिल रही हैं।
जानकारों के आकलन के मुताबिक, 44 दिनों तक चलने वाले माघ मेले में इस बार 15 से 20 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इतनी बड़ी संख्या में आगंतुकों के कारण करीब तीन हजार करोड़ रुपये के कारोबार और पांच लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है। मेला प्रारंभ होने से पहले और समापन के बाद तक निर्माण, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा, परिवहन और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों को काम मिलता है। मेला क्षेत्र में टेंट, पंडाल, मंच निर्माण, होटल-धर्मशाला, नाव संचालन, पूजा सामग्री, खानपान, फल-सब्जी, फूल-माला, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की बिक्री से कारोबार में तेजी आती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि माघ मेले में आने वाला एक श्रद्धालु औसतन यात्रा, ठहराव, भोजन और खरीदारी पर दो से तीन हजार रुपये खर्च करता है। इसका असर केवल प्रयागराज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि 150 किलोमीटर के दायरे में स्थित शहरों और कस्बों तक आर्थिक लाभ पहुंचता है।
धार्मिक पर्यटन में बढ़ोतरी के चलते अयोध्या, वाराणसी सहित अन्य तीर्थस्थलों पर भी श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ रही है, जिससे वहां के होटल, परिवहन और स्थानीय कारोबार को मजबूती मिल रही है। पूर्व मेला अधिकारियों और व्यापार संगठनों का मानना है कि माघ मेला रोजगार सृजन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। छोटे दुकानदारों, ठेला-खोमचा संचालकों, ई-रिक्शा व ऑटो चालकों से लेकर कारीगरों और सेवा प्रदाताओं तक, बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन से अपनी आजीविका चलाते हैं। कुल मिलाकर माघ मेला आस्था, आजीविका और अर्थव्यवस्था—तीनों को जोड़ने वाला ऐसा आयोजन बन चुका है, जो हर वर्ष क्षेत्रीय विकास को नई ऊर्जा देता है।


