नालासोपारा (सं.भा.): वसई–विरार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। नालासोपारा पश्चिम में अन्य दलों से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं का भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का सिलसिला तेज हो गया है, जिससे क्षेत्र का राजनीतिक संतुलन बदलता नजर आ रहा है। लगातार हो रहे इन पक्ष प्रवेशों से भाजपा की स्थिति मजबूत होती जा रही है, जबकि बहुजन विकास आघाड़ी (बविआ) के सामने संगठनात्मक चुनौती खड़ी होती दिख रही है।
जानकारी के अनुसार, हाल के दिनों में बविआ से जुड़े कई पदाधिकारी और सक्रिय कार्यकर्ता पार्टी नेतृत्व से नाराज होकर भाजपा में शामिल हुए हैं। इन नेताओं का कहना है कि उन्हें अपनी पुरानी पार्टी में न तो अपेक्षित सम्मान मिला और न ही विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका। इसके विपरीत भाजपा का संगठित ढांचा, स्पष्ट नेतृत्व और आगामी चुनावों को लेकर रणनीतिक तैयारी उन्हें आकर्षित कर रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नालासोपारा पश्चिम में यह बदलाव केवल औपचारिक पक्ष प्रवेश नहीं, बल्कि क्षेत्र की बदलती राजनीतिक सोच का संकेत है। जिस इलाके में लंबे समय तक बविआ का प्रभाव रहा, वहां अब भाजपा की बढ़ती सक्रियता नए राजनीतिक समीकरण बना रही है। वहीं दूसरी ओर, बविआ के भीतर असंतोष के संकेत भी सामने आने लगे हैं। कार्यकर्ताओं के लगातार पार्टी छोड़ने से पूर्व सभापति अतुल सालुंखे के नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि इन घटनाक्रमों का असर आने वाले मनपा और स्थानीय निकाय चुनावों में साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।


