…राजेश विक्रांत
“संगठन भारत’ का जिस तरह उद्देश्य समर्पित समाज सेवा है। विभिन्न जातियों और धर्म के लोगों को जोड़ना है। समाज का विकास करना है। समाज में रचनात्मकता की रोशनी फैलानी है। समाज को प्रगतिशील करना है। साहित्य, कला और संस्कृति की अभिवृद्धि करनी है। ठीक उसी प्रकार से अपना शहर मुंबई भी है। मुंबई दुनिया का एक अनोखा अप्रतिम शहर है जो सभी को साथ लेकर चलने की भावना का पक्षधर है। श्री राज किशोर तिवारी जी अपने अखबार “संगठन भारत” तथा अपने स्वयंसेवी संगठन “परिवर्तन फाउंडेशन” के जरिए जिस तरह का अप्रतिम सामाजिक कार्य कर रहे हैं, मुंबई शहर ऐसे कार्यों को हमेशा सपोर्ट करता है।
मैं मुंबई शहर की बात करूं तो इस शहर से मुझे असीम लगाव है। यह शहर मेरे मन, प्राण और आत्मा में रचा बसा है। इस वजह से मेरे लेखन का प्रमुख केंद्र बिंदु भी यही शहर है। अगर बात की जाए मुंबई पर रचनात्मक लेखन करने की तो मेरा मुंबई पर पहला लेख व्यंग्य लेख था “मुंबई मेरी जान” जो सांध्य हिंदी दैनिक समाचार पत्र “दोपहर का सामना” में 1994 में प्रकाशित हुआ था। इस लेख को लिखने की प्रेरणा मुझे वर्तमान समय में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और उस समय दोपहर का सामना के चीफ रिपोर्टर श्री प्रेम शुक्ल जी ने दी। मुंबई पर मेरा पहला उल्लेखनीय कार्य सन 2012 में दैनिक सामना के वरिष्ठ पत्रकार प्रभाकर पवार की पुस्तक “मुंबईतील गुन्हेगारीचा एनसाइक्लोपीडिया” का मराठी से हिंदी में अनुवाद “मुंबई माफिया: एक एन्साइक्लोपीडिया” रहा, इसके प्रेरक भी प्रेम शुक्ल जी ही रहे।
2017 में दोपहर का सामना के वर्तमान निवासी संपादक ( मुंबई) अनिल तिवारी जी ने एक साप्ताहिक स्तंभ “आमची मुंबई” लिखने की जिम्मेदारी मुझे सौंपी। ये स्तंभ मार्च 2020 तक लगातार प्रकाशित होता रहा। इस स्तंभ में निरन्तर प्रकाशन से मुझे 2019 में “आमची मुंबई” के लेखन की प्रेरणा मिली। इसके बाद 2022 में “आजादी की लड़ाई में मुंबई का योगदान’ ( आचार्य पवन त्रिपाठी जी के साथ सह लेखन) आई। फिर 2024 में उसका मराठी अनुवाद आया- “स्वातंत्र्य लढ्यातील मुंबईचे योगदान”। ये अनुवाद अमेरिका की कवयित्री सुश्री पल्लवी शिंदे माने ने किया था। 2024 में ही मुंबई और हिंदी ( डॉ दीनदयाल मुरारका के साथ सहलेखन) प्रकाशित हुई। जीतसिंह चौहान संपादित “आदिज्ञान” पत्रिका के मुंबई का कोली समुदाय विशेषांक का संपादन व संयोजन किया। इस साल मुंबई पर दो पुस्तकें प्रकाशकाधीन हैं- “आमची मुंबई-2” तथा “रोम- रोम में राम: मुंबई में रामलीला के भगीरथ कर्मवीर पंडित शोभनाथ मिश्र की जीवन गाथा।”
इन्हीं महत्वपूर्ण कार्यों की बदौलत और मुंबई पर फोकस निरंतर लेखन करने के लिए महाराष्ट्र सरकार की “महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी” ने मुझे 18 मार्च 2025 को “राज्य स्तरीय जीवन गौरव सम्मान छत्रपति शिवाजी महाराज राष्ट्रीय एकता पुरस्कार” से सम्मानित किया।
मुंबई को सपनों का शहर कहा जाता है। वो सपने जो शायद किसी और शहर में केवल मजाक की तरह देखे जाते होंगे वो सभी इस शहर में आकर सच हो जाते हैं। बस जरूरत होती है तो मेहनत और लगन की। ये शहर हर किसी को सपना देखने की आजादी देता है और उन सपनों का पीछा करने में मदद भी करता है। हर साल करीब 1.7 मिलियन लोग ऐसे ही कुछ सपने लिए मुंबई आते हैं। चाहे आप एक्टर बनने की चाहत रखते हों या क्रिकेटर, अगर आप मुंबई में हैं तो आप अपनी हर ख्वाहिश को पूरा कर सकते हैं।
मुंबई में हर इंसान के लिए भरपूर जगह है। इस शहर में मेहमानों को भी उतना ही अपनापन और प्यार मिलता है जितना कि यहाँ रहने वालों को। लेकिन ये शहर इतना बड़ा है कि यहाँ एक बार आने से आपका मन नहीं भरेगा। मुंबई को अच्छी तरह से महसूस करने के लिए आपको कुछ दिन तो क्या कुछ हफ्ते मुंबई में रहना चाहिए। यहाँ की भीड़, उमस भरी गर्मी और बिन मौसम बारिश का एहसास लेना चाहिए। यकीन मानिए आप एक बार मुंबई आ गए तो आपका वापस जाने का दिल नहीं करेगा।
मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया, बांद्रा वर्ली सी लिंक, अटल सेतु, मेट्रो, मोनो रेल हैं। बुलेट ट्रेन की व्यवस्था हो रही है। खूबसूरत समुद्री तट हैं। लोकल ट्रेनें आम तौर पर यातायात का साधन नहीं हैं, बल्कि शहर का जीवन दर्शन हैं। सुबह-शाम, लाखो लोग इनमें सफ़र करते हैं, अपने सपने को पूरा करने के लिए। लोकल ट्रेन में सफर करके आप मुंबई की असली जिंदगी को देख सकते हैं, लोगों से बात कर सकते हैं और शहर की ऊर्जा को महसूस कर सकते हैं। यह अनुभव भीड़भाड़ वाला हो सकता है, लेकिन यह निश्चित रूप से यादगार बना हुआ है। गेटवे ऑफ इंडिया पर एक भरा पूरा इतिहास सांसें लेता हुआ आप अनुभव कर सकते हैं। मुंबई का एक प्रतिष्ठित स्थान गेटवे ऑफ इंडिया वस्तुतः एक इमारत नहीं, बल्कि इतिहास के एक बड़े कालखंड का गवाह भी है। यहां से आप अरब सागर के नजारे का आनंद ले सकते हैं और मुंबई के इतिहास के बारे में जान सकते हैं। शाम के समय, यहाँ का माहौल ज्यादा मनमोहक और ख़ूबसूरत हो जाता है जब रोशनी में नहाया हुआ गेटवे ऑफ़ इंडिया और भी आकर्षक लगता है। इसके बाद मरीन ड्राइव से भी अरब सागर के जादू को अपनी आंखों में बसा सकते हैं। ‘क्वीन्स नेकलेस’ की छटा लिए मरीन ड्राइव पर शाम के समय टहलना एक अद्भुत अनुभव है। अरब सागर की लहरें, अनंत हवा और शहर की जगमगाती रोशनी, सब मिलकर एक ऐसा नजारा दिखाते हैं जो आपके दिल को छू जाएगा। यहां आप घंटों समुद्र को निहार सकते हैं और मुंबई की जिंदगी का आनंद ले सकते हैं। इस तरह के अनुभव आपको मुंबई में ही मिलेंगे। जय हिंद। जय मुंबई।


