- कंपनी ने पेश किए आंकड़ों के साथ तर्क
प्रमोद कुमार..
ठाणे (सं. भा.) भिवंडी और शील-मुंब्रा-कलवा क्षेत्र में बिजली आपूर्ति का कार्य संभाल रही टोरेंट पावर पर कुछ राजनीतिक समूहों द्वारा उपभोक्ताओं से अधिक बिल वसूलने का आरोप लगाया जा रहा है। लेकिन कंपनी की ओर से दिए गए तथ्यों और आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि यह आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
दरअसल, टोरेंट पावर महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) की फ्रेंचाइज़ी के तौर पर काम करती है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि उसे बिजली टैरिफ निर्धारित करने का कोई अधिकार नहीं है, बल्कि वह केवल MSEDCL और महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (MERC) द्वारा स्वीकृत दरों पर ही बिलिंग करती है।
कंपनी के अनुसार, भिवंडी और शील-मुंब्रा-कलवा के उपभोक्ताओं को वही दरें लागू होती हैं, जो राज्य के अन्य शहरों जैसे पुणे, नागपुर, नासिक और ठाणे में लागू हैं।

टोरेंट पावर द्वारा साझा किए गए बिलिंग आंकड़े बताते हैं कि:
कुल आवासीय उपभोक्ता: 3.10 लाख
51% उपभोक्ताओं की मासिक खपत 100 यूनिट या उससे कम है
52% उपभोक्ताओं का मासिक बिल 1000 रुपये से कम आता है
79% उपभोक्ताओं का मासिक बिल 2000 रुपये से कम है
कंपनी ने यह भी बताया कि इन बिलों में 128 रुपये का फिक्स्ड चार्ज शामिल होता है, जो 0 यूनिट खपत पर भी लागू होता है।
इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि आधे से ज्यादा उपभोक्ताओं का बिल 1000 रुपये से नीचे है। ऐसे में यह दावा करना कि “अधिकतर उपभोक्ताओं को भारी भरकम बिल मिल रहे हैं”, तथ्यात्मक रूप से गलत साबित होता है।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह MSEDCL और MERC के दिशा-निर्देशों के तहत ही काम कर रही है और बिलिंग प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी एवं नियामक मानदंडों पर आधारित है।
कुल मिलाकर, टोरेंट पावर के खिलाफ लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और आंकड़ों के आधार पर उपभोक्ता निश्चिंत रह सकते हैं कि उनकी बिलिंग राज्य सरकार की तय नीतियों के अनुरूप हो रही है।


