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कहां खत्म होगी बंगाल की लड़ाई?

पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा जैसे थमने का नाम नहीं ले रही। इस मामले में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से हस्तक्षेप का अनुरोध किया गया। आरोप लगाया गया कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमले किए जा रहे हैं। राज्य में स्थिति को ‘चिंताजनक’ बताते हुए तमाम हिंदूवादी संगठनों ने राष्ट्रपति से इस पर संज्ञान लेने तथा केन्द्र सरकार को पश्चिम बंगाल में विधि का शासन बहाल करने के लिए उचित कदम उठाने की सलाह देने का अनुरोध किया गया। राष्ट्रपति को लिखे गए एक पत्र में विश्व हिंदू परिषद ने आरोप लगाया, ‘‘पश्चिम बंगाल में प्रदेश भर में हो रही भीषण, उन्मादपूर्ण एवं उन्मुक्त हिंसा एजेंडा से प्रेरित एवं पूर्व नियोजित एवं सोच समझकर की जा रही है।’’ दावा किया गया कि राज्य में विधानसभा चुनावों के दौरान तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने धमकी देते हुए कहा था कि राज्य में केन्द्रीय बल सिर्फ चुनाव तक ही रहेंगे, चुनाव के बाद सत्ता की बागडोर उनके हाथों में होगी। गौरतलब है कि ममता बनर्जी की पार्टी ने विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल की है। विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने आरोप लगाया, ‘‘पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणाम की घोषणा के साथ सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ‘जेहादियों’ के साथ मिलकर राज्य में बेहद क्रूरतापूर्ण हिंसा को अंजाम दे रही है।’’ ‘‘ऐसा लगता है कि पुलिस और प्रशासन को नजर फेर लेन और हिंसक घटनाओं की अनदेखी करने को कहा गया है। यह 1946 की ‘कलकत्ता की भीषण हत्याओं’ वाली ‘प्रत्यक्ष कार्रवाई’ का स्मरण दिलाती है, जो पाकिस्तान का समर्थन करने वाले मुस्लिम लीग द्वारा अंजाम दी गयी थी।’’ विहिप का दावा है, ‘‘तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और जेहादियों की साठगांठ से विपक्ष के कार्यकर्ताओं की खुलेआम हत्या की जा रही है। कूच बिहार से लेकर सुन्दरबन तक हिन्दुओं को डरा कर भगाने और अपना मूल निवास छोड़ने को विवश किया जा रहा है।’’ विहिप की ये बातें यदि सही हैं तो यह एक भयावह स्थिति को दर्शाता है। वैसे पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा आम बात है, मगर जिस तरह से हिंदुओं को टार्गेट कर उनकी हत्या करने और उन्हें पश्चिम बंगाल से बेदखल करने की साजिश हो रही है, वह भयावह है। जम्मू कश्मीर से कश्मीरी पंडितों के साथ किए गए अत्याचार और उन्हें वहां से भागने को मजबूर करने की घटना याद आ रही है। किस तरह से उस समय कश्मीरी पंडितों पर जुर्म किए गए। महिलाओं पर अत्याचार हुए। उन्हें उनके ही घर मकान से बेदखल कर दिया गया। जिसके घाव आज भी कश्मीरी पंडितों के जहन में जिंदा है। वे आज भारत के जिस भी कोने में रह रहे हो, मगर उन अत्याचारों की टीस अभी जिंदा है। कहीं पश्चिम बंगाल सरकार भी उसी राह पर तो नहीं चल पड़ी है। राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा गया है, ‘‘चूंकि हिंसा बिना किसी उकसावे के जारी है, इससे देश के सामने यह साफ हो गया है कि जब तक पश्चिम बंगाल प्रशासन पर नकेल नहीं कसी जाएगी और तुरंत संतुलन नहीं बनाया जाएगा, यह बहुत बर्बादी फैला सकता है। ऐसा भी संभव है कि कुछ जगहों पर हिन्दू समाज को अपनी सुरक्षा के लिए स्वयं तरीके खोजने पड़ेंगे। दोनों ही हालात पूरे देश के लिए चिंता की बात हैं।’’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भी पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा की निंदा करते हुए कहा है राज्य में अनियंत्रित तरीक़े से हुई राज्यव्यापी हिंसा न केवल निंदनीय है, बल्कि पूर्व नियोजित भी है तथा लोकतंत्र की मूल भावना के भी विपरीत है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने अपने बयान में कहा कि बंगाल में असामाजिक शक्तियों ने महिलाओं के साथ घृणास्पद बर्बर व्यवहार किया, निर्दोष लोगों की क्रूरतापूर्ण हत्याएँ कीं, घरों को जलाया। इन घटनाओं में व्यवसायिक प्रतिष्ठानों-दुकानों को लूटा गया। हिंसा के फलस्वरूप अनुसूचित जाति-जनजाति समाज के बंधुओं सहित हज़ारों लोग अपने घरों से बेघर होकर प्राण-मान रक्षा के लिए सुरक्षित स्थानों पर शरण के लिए मजबूर हुए हैं। इस पाशविक हिंसा का सर्वाधिक दुखद पक्ष यह है कि शासन और प्रशासन की भूमिका केवल मूक दर्शक की ही दिखाई दी है। दंगाइयों को ना ही कोई डर दिखाई दे रहा है और ना ही शासन-प्रशासन की ओर से नियंत्रण की कोई प्रभावी पहल दिखाई दे रही है। किसी भी नव निर्वाचित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता राज्य में चल रही हिंसा को तुरंत समाप्त कर क़ानून का शासन स्थापित करना, दोषियों को अविलंब गिरफ्तार कर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना, हिंसा-पीड़ितों के मन में विश्वास और सुरक्षा का भाव पैदा करना होना चाहिए। समाज के सभी प्रबुद्ध जनों, सामाजिक-धार्मिक-राजनैतिक नेतृत्व की यही जवावदेही हो कि इस संकट की घड़ी में वे पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होकर विश्वास का वातावरण बनायें, हिंसा की कठोर शब्दों में निंदा करें एवं समाज में सद्भाव और शांति व भाईचारे का वातावरण खड़ा करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायें। इन घटनाओं से क्षुब्ध प्रवासियों ने अमेरिका और ब्रिटेन के प्रमुख शहरों समेत कई स्थानों पर प्रदर्शन किए। उन्होंने बंगाल में बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के बाद ‘‘न्याय और जांच’’ की मांग की। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ राज्य के मौजूदा हालात पर अपनी चिंता व्यक्त कर चुके हैं। उन्होंने तो यह भी कहा कि जान बूझकर हालात को खराब होने दिया जा रहा है, जो तर्कसंगत कतई नहीं हो सकता।

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