अभी अभी उत्तर प्रदेश में संपन्न हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में महिला सशक्तिकरण का परचम भी लहराया है। सिद्धार्थनगर, गौतमबुद्ध नगर और बलरामपुर जिले में तो महिला सशक्तिकरण की एक नई इबारत भी लिखी गई।
उत्तर प्रदेश में चार चरणों में हुए पंचायत चुनावों का परिणाम 2 मई को निकल गया। इस चुनाव में 1289830 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला हुआ जिसमें जिला पंचायत सदस्य के 3050 पद रहे जिनके लिए 44397 प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई। इनमें से सात कैंडिडेट पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं बाकी के ग्राम प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्य के पद रहे। सभी पर नियमानुसार महिला आरक्षण का ध्यान रखा गया। चुनाव परिणामों से जाहिर होता है कि उत्तर प्रदेश की महिलाओं में अपनी मंजिल पाने के लिए एक जुनून है। समाजशास्त्री हेमलता त्रिपाठी कहती हैं कि यूपी में पिछले कुछ सालों से महिला सशक्तिकरण की लहर तेजी से बह रही है। इसी का परिणाम है कि 2021 के पंचायत चुनावों में महिलाओं ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया और जीत भी हासिल की।
अब बात करते हैं उन जिलों की जहाँ महिलाओं का रुतबा बुलंद हुआ है। सिद्धार्थ नगर में एक कार्यकाल में एक अंतरराष्ट्रीय व पांच राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर पिंक विलेज के नाम से मशहूर हसुड़ी औसानपुर ग्राम पंचायत के सभी 11 वार्डों में पंचायत चुनाव लड़ रही महिलाएं निर्विरोध निर्वाचित हुई। दिलीप त्रिपाठी लगातार दूसरी बार चुनाव जीतकर ग्राम प्रधान बने। यह उत्तर प्रदेश का पहला गांव है जहां ग्राम पंचायत की सभी सदस्य महिलाएं हैं इन्हीं महिलाओं के हाथों में शिक्षा स्वच्छता जल प्रबंधन चिकित्सा एवं अन्य समितियों की जिम्मेदारी होगी। हसुड़ी औसानपुर जिले के भनवापुर ब्लाक क्षेत्र में स्थित है। गांव की कुल आबादी लगभग 1100 है। विकास के मामले में प्रदेश के आकांक्षी जनपदों में शुमार सिद्धार्थनगर को अपने गांव हसुड़ी औसानपुर के बदौलत देश दुनिया में जाना जा रहा है।
हसुड़ी औसानपुर को कई अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर के पुरस्कार मिल चुके हैं।अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार के रूप में मालदीव ग्लोबल यूथ पीस एंबेसडर अवॉर्ड मिला है जबकि ये गाँव लगातार तीन बार पंडित दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण राष्ट्रीय पुरस्कार ( 2017 से 2020 तक) से सम्मानित हुआ है।
लगातार दो बार नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा सम्मान ( 2017 एवं 2018 में) तथा सन 2020 में डॉ राम मनोहर लोहिया पंचायत सशक्तिकरण राज्य पुरस्कार भी मिल चुका है।
इस ग्राम पंचायत का वातानुकूलित और डिजिटल ग्राम पंचायत भवन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई को समर्पित है। यहां सभी जानकारी ऑनलाइन मिलेगी और यहां का उच्चीकृत स्कूल पूरी तरह से वातानुकूलित एवं कंप्यूटर लैब से सुसज्जित है।
ग्राम प्रधान दिलीप त्रिपाठी कहते हैं कि महिलाएं ही ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी उठाएंगी। शिक्षा समिति होगी, जो बच्चों के पढ़ाई के बारे में कार्य करेगी, जल समिति शुद्ध पेयजल की आपूर्ति पर ध्यान देगी। इसके अलावा भी कुछ और समितियां भी हैं जो गांव का सर्वांगीण विकास करेगी। जिले के मुख्य विकास अधिकारी पुलकित गर्ग के अनुसार ग्राम पंचायत के सभी सदस्यों के रूप में महिलाओं का निर्वाचित होना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। प्रधान दिलीप त्रिपाठी ने पिछले कार्यकाल में गांव का चौमुखी विकास किया था। गांव की सुविधाओं को हाईटेक करने के साथ ही गांव की सड़कों को सीसी एवं इंटरलॉक करवाया। गांव के हर घर की दीवारों को पिंक कलर से रंगवाते हुए आधुनिक डिजाइन बनवाए। इसके चलते गांव को पूरे प्रदेश में पिंक विलेज के नाम से जाना जाने लगा। गाँव का प्राइमरी स्कूल प्रदेश का पहला एयर कंडीशन स्कूल बना। ग्रामीणों को सरकार की योजनाएं टीकाकरण की जानकारी समय-समय पर घर बैठे ही मिलती रहे, इसके लिए पब्लिक ऐड्रेस सिस्टम लगवाया गया है। एक जगह से अनाउंसमेन्ट होते ही पूरे गांव को जानकारी मिल जाती है। बाहरी लोगों की आवाजाही की निगरानी के लिए 23 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।
गौतम बुद्ध नगर जिले की बात करें तो महिलाओं के लिए 30 फ़ीसदी ग्राम पंचायतों में पद आरक्षित था लेकिन महिलाओं ने 44 फीसदी ग्राम पंचायतों पर कब्जा किया है। जिले की करीब आधी पंचायतों में महिलाएं ग्राम प्रधान निर्वाचित हुई हैं। इनमें से 15 ग्राम प्रधान वे महिलाएं हैं जिनके प्रतिद्वंद्वी पुरुष थे। सबसे ज्यादा दादरी विकासखंड में 17 महिलाएं ग्राम प्रधान बनी हैं। बिसरख में 12 महिलाएं ग्राम प्रधान का चुनाव जीती हैं, जबकि जेवर क्षेत्र में 11 पंचायतों में महिलाओं ने अपना परचम लहराया है। जिला सूचना अधिकारी राकेश चौहान के मुताबिक बिसरख प्रखंड में ग्राम पंचायतों की संख्या 24 है। 30 फीसदी आरक्षण की बदौलत आठ ग्राम पंचायतों में प्रधान पद महिलाओं के लिए आरक्षित थे। इन आठ ग्राम पंचायतों के अलावा बिसरख में चार ऐसी ग्राम पंचायतें हैं जहां महिलाओं ने पुरुषों को हराकर प्रधान पदों पर कब्जा किया।
अब बलरामपुर जनपद की बात, जहां पर 21 वर्ष की बिटिया ने जीता जिला पंचायत का चुनाव जीतकर उत्तर प्रदेश में सबसे कम उम्र की जिला पंचायत सदस्य बनने का खिताब अपने नाम किया है। महारानी लाल कुंअरि स्नातकोत्तर महाविद्यालय की बीए तृतीय वर्ष की छात्रा आरती ने जिला पंचायत क्षेत्र चौधरीडीह से जीत दर्ज की है।आरती तिवारी भाजपा के समर्थन से चुनाव लड़ी थी। दिग्गजों को हराकर चुनाव में जीत दर्ज करने वाली आरती को 7157 मत प्राप्त हुए। अपने चाचा श्याम मनोहर तिवारी की प्रेरणा से आरती ने राजनीति में अपनी राह चुनी।


