कोरोना की पहली लहर के बारे में तो शायद ही किसी को ज्ञात था और उसके बाद दूसरी लहर आएगी वह भी इससे भयंकर, इससे सब अनभिज्ञ थे। इसलिए कोरोना ने अपने पांव पूरी तरह से जमा लिए। चारों ओर त्राहि-त्राहि मची हुई है, ऑक्सीजन तक नहीं मिल रही है, लोग अपने बीमार परिजनों को इधर से उधर लेकर भटक रहे हैं, शवों को जलाने का स्थान तक नहीं मिल रहा ,लकड़ियां कम पड़ रही हैं, शवों को कुत्ते नोच कर खा रहे हैं, आखिर यह सिलसिला कब तक चलेगा। इसका एक ही जवाब है ..अभी भी वक्त है संभल जाओ अब नहीं संभलोगे तो कब संभलोगे
अब कोरोना की तीसरी लहर आने वाली है, जबकि दूसरी की जड़ें अभी काटी नहीं गई हैं। लेकिन इसी लहर की आहट के साथ उससे निपटने की तैयारियां जोरों से शुरु हो चुकी हैं। भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के
विजय राघवन ने बताया कि देश में तीसरी लहर को किसी भी तरह रोका नहीं जा सकता। हम अपनी तैयारियों से इसे खत्म कर सकते हैं। पहली लहर के बाद हमारी लापरवाही से इतनी तबाही मची ,अगर हम संभल जाते तो शायद आज जो मंजर देखने को मिल रहा है वह देखने को नहीं मिलता ।हमारी यही गलती आज हम पर भारी पड़ रही है। दूसरी लहर भले ही शांत हो जाए लेकिन हम कोविड अनुकूल व्यवहार जारी रखेंगे क्योंकि इतने अपनों को खोने के बाद अब सहनशक्ति और हिम्मत तो बाकी बची ही नहीं। तीसरी लहर हमारे किशोरों और बच्चों को प्रभावित ना करें इसके लिए टीकाकरण ही अमोघ शस्त्र है। कोविड की हर लहर की काट अपनी वैक्सीन से करेंगे। यह प्राण रक्षक टीका 50 फीसद जनसंख्या को भी लग जाए तो हम आने वाली लहर का रुख मोड़ देंगे।
ज्ञातव्य है कि इजराइल, यूके और अमेरिका जहां क्रमशः 60 फीसद, 52 फीसद और 45 फीसद लोगों को टीके की कम से कम एक डोज दी जा चुकी हैं वहां संक्रमण की दर काफी नीचे आ चुकी है। इन देशों ने बच्चों को टीका लगाए बगैर ही संक्रमण के नियंत्रित कर लिया। शोध से पता चला कि एक डोज भी पर्याप्त एंटीबॉडी का निर्माण कर रही है जो असंक्रमित लोगों की दो डोज के बराबर है। इसलिए वैक्सीन एक अमोघ शस्त्र है ।विशेषज्ञ इसी वर्ष तीसरी लहर की आशंका जता रहे हैं। राष्ट्रीय कोविड-19 टास्क फोर्स के सदस्य तथा बेंगलुरू स्थित इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ के महामारी विशेषज्ञ व प्रोफेसर डॉक्टर गिरिधर बाबू ने बताया — अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर में तीसरी लहर आ सकती है इसलिए दिवाली से पहले ही टीकाकरण हो जाना चाहिए। तीसरी लहर का आना कई पहलुओं पर निर्भर करेगा –टीकाकरण की स्थिति, आयोजनों की रोकथाम, भीड़-भाड़ इलाके वालों पर रोक आदि -आदि। किसी भी योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए जनता की भागीदारी अनिवार्य है। विश्व स्वास्थ्य संगठन व देशों की सरकारों ने कोरोना से निबटने के लिए मांस पहनने व शारीरिक दूरी का पालन करने और बार-बार हाथ धोने जैसे नियम बनाए और जनता ने इनका तत्परता से पालन किया। इनका पालन अगर हमारा देश और उसमें रहने वाले हर व्यक्ति करें तो जीतेंगे हम ही ।यह तो निश्चित है। बस ध्यान रखें दो गज की दूरी और मास्क है जरूरी।
नंन्दिनी रस्तोगी ‘नेहा’ मेरठ


