मुंबई (संवाददाता) मनपा स्कूलों के अध्यापकों को ही कार्यालयीन काम-काज निपटाने होंगे। प्रशासन ने स्कूलों में लिपिक (क्लर्क) की नियुक्ति से इंकार किया है। प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि मनपा की आर्थिक स्थिति १०८३ लिपिकों का बोझ उठाने काबिल नहीं हैं। यदि सरकार पदों को मंजूर करती भी है तो इसके लिए बजट में आर्थिक प्रावधान करना प़डेगा।
मुंबई मनापा हर साल शिक्षा पर लगभग २ हजार ३०० करो़ड रुपए खर्च करती है। मनपा विभिन्न माध्यमों के कुल १०८३ स्कूलों का संचालन करती हैं, जिसमें ३ लाख ३८ हजार ८७६ विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं। मनपा स्कूलों में शिक्षकों की संख्या १० हजार ४१३ है। शिक्षा को ब़ढावा देने एवं प्राथमिक स्कूलों में प़ढने वाले बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार की तरफ से विभिन्न योजनाएं क्रियान्वित की जाती हैं इन सब के अलावा अन्य कार्यालयीन काम भी मनपा स्कूलों के शिक्षकों एवं मुख्याध्यापकों को करने प़डते हैं जिसकी वजह से स्कूलों में पठन पाठन का काम प्रबावित होता है।
आर्थिक बोझ बताकर लिपिकों की नियुक्ति को टाला नहीं जा सकता हैं। शिक्षकों के कार्यालयीन काम करने से शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही हैं। निजी स्कूलों में क्लर्क उपलब्ध हैं । ”
स्कूलों के काम-काज के क्रियान्वयन के लिए लिपिकों की नियुक्ति जरुरी हैं। जिससे शिक्षक अधिक समय कक्षा में प़ढाने का काम कर सकेंगे।


