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अस्पतालों में नहीं फायर सेफ्टी

उन्नाव (सं. भा.) : सरकारी हो या गैर सरकारी अस्पताल सभी में फायर फाइ¨टग का प्रबंध नाकाफी है। अधिकांश अस्पतालों में आग से निपटने के लिए फायर एक्सटिंग्यूशर (सीज फायर सिलेंडर) का ही सहारा है। बहुमंजिला नर्सिंगहोम हो या जिला अस्पताल कहीं भी हाइड्रेट प्वाइंट के लिए क्लैंप नहीं लगी है। इससे अगर कभी आग लगी तो दमकल का ही सहारा होगा। शहर के एक शो रूम में हुए भयानक अग्निकांड के बाद भी अग्निशमन विभाग संजीदा नजर नहीं आ रहा है।

जिला महिला और पुरुष दोनों ही अस्पतालों की ओपीडी में एक-एक सीज फायर सिलेंडर लगा है। जब कि दोनों ही तरफ लगभग दस-दस कक्ष बने हैं। दोनों अस्पतालों की ओपीडी में प्रतिदिन एक हजार से अधिक रोगी और उनके तीमारदारों की भीड़ रहती है। किसी भी डाक्टर के ओपीडी कक्ष में फायर एक्सटिंग्यूशर (सीज फायर सिलेंडर) नहीं लगा है। पुरुष अस्पताल के दोनों वार्ड और नई इमरजेंसी में दो-दो सिलेंडर लगे हैं जबकि महिला अस्पताल वार्ड के स्टाफ रूम में एक सीज फायर सिलेंडर हैं। यह हाल भी तब है जब गत वर्ष महिला अस्पताल के नए वार्ड में संचालित एसएनसीयू में दो बार शार्टसर्किट से इलेक्ट्रिक बोर्डों में आग लग चुकी है। महिला जिला अस्पताल की ओपीडी में औसतन प्रतिदिन दो से ढाई सौ महिलाएं दवा इलाज के लिए आती हैं। यहां टीकाकरण भी होता है, बच्चे और अभिभावक मिलाकर लगभग एक सौ की भीड़ टीकाकरण कक्ष के बाहर रहती है। अल्ट्रासाउंड और रक्त आदि के लिए जो लोग आते हैं उनकी संख्या भी सैकड़ों में रहती है। वार्ड में औसतन प्रतिदिन 35 से 40 रोगी भर्ती रहते हैं। लगभग 20-25 प्रसव प्रतिदिन होते हैं। पुरुष अस्पताल की ओपीडी में भी लगभग एक से डेढ़ हजार मरीज प्रतिदिन आते हैं इसके अलावां सौ से सवा सौ मरीज इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक में भर्ती होते हैं। इसके बावजूद आग से निपटने का माकूल प्रबंध नहीं है।

नर्सिंगहोमों में खानापूर्ति

शहर में 75 नर्सिंगहोम पंजीकृत हैं। इनमें छह दो मंजिला भवनों में संचालित बड़े नर्सिंगहोम हैं। किसी भी नर्सिंगहोम में पानी के लिए हाइड्रेट प्वाइंट नहीं हैं। यहां भी फायर एक्सटिंग्यूशर के सहारे आग से निपटने के प्रबंध की खानापूर्ति कर रखी गई है। सबसे खास बात यह है कि सभी संचालकों के पास अग्निशमन विभाग की एनओसी है। लेकिन एक दो को छोड़ एक भी नर्सिंगहोम ऐसा नहीं है जहां आग से निपटने के मानक पूरे किए गए हों।

फायर एक्सटिंग्यूशर का परीक्षण नहीं सरकारी हो या गैर सरकारी अस्पताल अग्निशमन विभाग फायर एक्सटिंग्यूशर की संख्या और वैधता तिथि को चेक कर अपने कर्तव्यों की इति श्री कर लेता है। यही नहीं फायर एक्सटिंग्यूशर काम कर रहे हैं इसका आकस्मिक प्रायोगिक परीक्षण भी नहीं कराया गया है। यहां नहीं हैं फायर एक्सटिंग्यूशर प्लास्टिक सर्जरी एवं बर्न यूनिट में सर्जरी और नेत्ररोग विभाग संचालित है , ट्रामासेंटर में हड्डी रोग विभाग चल रहा है। हृदयरोग विभाग आदि में फायर स्ट्यूंगेटर नहीं लगे हैं। जबकि इन सभी विभागों में प्रतिदिन सैकड़ों की भीड़ होती है। नियमानुसार अस्पताल के हर कक्ष में कम से कम एक और वार्डों में दो-दो फायर एक्सटिंग्यूशर होने चाहिए। महिला जिला अस्पताल में फायर एक्सटिंग्यूशर लगवाए गए हैं। वार्ड में एक सिलेंडर कम मिला है। जिसे लगवाने को कह दिया है। जल्द ही इसको चेक कराया और सभी कर्मचारियों को रिहर्सल के तौर सीज फायर सिलेंडर के प्रयोग का परीक्षण दिया जाएगा।

 

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