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कांचही बास केर बंहगी, बंहगी लचकत जाए, जैसे कर्ण प्रिय गीतों के साथ मुंबई में धूमधाम से संपन्न हुई छठ पूजा

मुंबई (संवाददाता) | देश की आर्थिक राजधानी की छठ पूजा के दिन छटा निराली थी| गणपति के बाद जलाशयों पर बड़ा जमावड़ा देखने को मिला| छठ के दिन श्रद्धालु सागर, नदियों और सरोवरों के किनारे जमा हुए| गन्ना,नारियल, केला, हल्दी अदरक, मेवा,मिठाई, ठेकुआ, मालाफूल चढ़ाया और दीप जलाकर अस्ताचल हो चले सूर्य की पूजा की| ठीक दूसरे दिन सुबह उसी तरह की पूजा सामग्री के साथ उगते सूर्य को दीप दिखा कर जल और दूध से अर्घ्य देकर जीवन में सुख-समृद्धि की मंगल कामना की | मुंबई की सभी चौपाटियों पर श्रद्धालु छाए रहे| कंकर उछालों तो निचे न पंहुच सकने वाली अपर भीड़ थी| शासन और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किया गया था| राजनितिक पार्टी भाजपा, कांग्रेस,सपा समेत कुछ सामाजिक संगठनों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया था| भाजपा के ओर से आयोजित कार्यक्रम में अगले साल की तरह मुख्य मंत्री देवेन्द्र फडणवीस पंहुच कर छठ ब्रतियों के साथ पूजा किए| मुख्य मंत्री ने पधार कर सभी उपासकों का मान बढ़ाया इसके लिए तमाम उपासक उनकी इस लायकियत की सराहना कर रहे है| मालाड पश्चिम के अक्सा और मार्वे के समुद्री किनारों पर बड़ी संख्या में लोग पूजा किये| शाम को पूरा जाम लगा रहा| मार्वे-मढ के तरफ जाने वाले मार्ग पर पुलिस वालों के साथ सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग खड़े होकर जाम कम करने की कोशिश में लगे थे| पूरे शहर में  कांचही बास केर बंहगी, बंहगी लचकत जाए, जैसे कर्ण प्रिय अनेक गीतों की गुनगुनाहट रही| ललाट और नाक तक लगे सिंदूर से महिलाओं ने जल में खड़े होकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया|

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