मुंबई (संवाददाता)। बंबई उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी मामले की जांच के दौरान पुलिस को पीड़ितों, शिकायतकर्ताओं या उनके परिवारों के चरित्र के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने से परहेज करना चाहिए।
न्यायमूर्ति एस.सी. धर्माधिकारी के नेतृत्व वाली पीठ ने एक हालिया आदेश में कहा कि किसी भी पुलिस अधिकारी को यह सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशीलता और परिपक्वता प्रदर्शित करनी चाहिए कि उसके कृत्य से किसी भी नागरिक की गरिमा और प्रतिष्ठा प्रभावित नहीं हो।
पीठ ने यह टिप्पणी एक याचिका की सुनवाई के दौरान की, जिसे मुंबई के एक नागरिक ने दायर की है, याचिका में मुंबई को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि याचिकाकर्ता के भाई का पता लगाया जाए जो दो साल पहले लापता हो गए थे। पिछले साल दाखिल याचिका के अनुसार याचिकाकर्ता के भाई अक्टूबर २०१५ में एक दिन सुबह घर से निकले और उसके बाद वह कभी नहीं लौंटे। पुलिस में शिकायत का भी कोई नतीजा नहीं निकला। इसके बाद याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय से हस्तक्षेप का अनुरोध किया।


