ढलने लगी है शाम दिले बेकरार है ।
आ जाओ जिंदगी में सिर्फ तुमसे प्यार है।।
हसरत भरी निगाह को कुछ तो शुकूं मिले।
अब तो झलक दिखा दो बडा़ इंतजार है।।
गुजरे नहीं गुजरता मेरा एक एक पल।
बहकी हुई फिजाओं में आई बहार है।।
उल्फत में मेरे यार मोहब्बत जवान है।
जाने क्युँ ये मचल रहा दिल बेशुमार है।।
शीशे सा तरासा हुआ ये मरमरी बदन।
मदहोश कर रहा है यूँ छाया खुमार है।।
गीतकार: रसियाकुमार


