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गज़ल

तेरे ख्वाब में हम तराना लिखेंगे,

मोहब्बत का सारा फसाना लिखेंगे।

अभी भी मुझे याद है सारे शिकवे,

वो वादाखिलाफी बहाना लिखेंगे।।

 

चलाकरके अपनी अदाओं का जादू,

मुझे इस कदर जानेमन तूने लूटा।

उन्हे भूल सकता हूँ कैसे बताओ,

वो हर बार का मुस्कुराना लिखेंगे।।

 

मेरे सामने से मटक कर गुजरना,

लचकती कमर से वो भूचाल लाना।

कसम से बडे़ खूबसूरत वो पल थे,

उन्हे फिर से बनकर दिवाना लिखेंगे।।

 

अजब थे नजारे जो तूने दिखाये,

मुझे रोड पर इस कदर लाके छोडा़।

न घर का रहा ,घाट का न हुआ मै,

तुम्हें उम्रभर को बेगाना लिखेंगे ।।

 

किसी और का यार होने से पहले,

इशारों में मुझको बताई तो होती।

तो ये दिन मेरी जिंदगी में न आता,

वो तीरे नजर का निशाना लिखेंगे।।

 

गीतकार: रसियाकुमार

मो* 9892850937

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