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जंग खा रही मशीन, गरीबों का अंधियारा दूर करने पर ग्रहण

जौनपुर (सं. भा.) : लेंस प्रत्यारोपण कर आंखों की ज्योति लौटाने की योजना ग्रहण कर लग रहा है। जिला अस्पताल में फेको मशीन कई साल से जंग खा रही है वहीं चार माह से लेंस की आपूर्ति न होने के कारण राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम जनपद में प्रभावित हो गया है। साधन संपन्न लोग तो प्राइवेट अस्पतालों में मोतियाबिंद का आपरेशन करा ले रहे हैं लेकिन तमाम गरीब-गुरबे अंधेरे में जीवन गुजारने को विवश हैं। जिम्मेदार इस खामी के अनजान हैं।

राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत हर साल लक्ष्य निर्धारित कर शिविर लगाकर मुफ्त में लेंस प्रत्यारोपण किया जाता है। इसके लिए सप्ताह में दो दिन निर्धारित तिथि पर जहां आपरेशन होता है वहीं जिला चिकित्सालय में हर दिन यह सुविधा प्रदान की गई है। यह अभियान तो सालभर चलता है लेकिन ठंड के सीजन में मरीज आपरेशन करना अधिक सुविधाजनक मानते हैं।

व्यवस्था में खामी कहें या जिम्मेदारों की लापरवाही जिले में लेंस की आपूर्ति सितंबर माह से बंद है। वहीं प्रशिक्षित चिकित्सक और फोल्ड लेंस के अभाव में चार साल से जिला चिकित्सालय में फेको मशीन जंग खा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक फेको विधि लेंस प्रत्यारोपण की आधुनिक पद्धति है।

जनपद में लेंस प्रत्यारोपण की स्थिति:-

कुल लेंस प्रत्यारोपण लक्ष्य-23500

गरीबों की योजनाओं पर लगा ग्रहण

लेस प्रत्यारोपण केंद्र-06

अब हुए लेंस प्रत्यारोपण-12400

दिसंबर में लेंस प्रत्यारोपण-2700

जनपद में यहां है लेंस प्रत्यारोपण की सुविधा:-

-उमानाथ सिंह जिला चिकित्सालय

-लीलावती नेत्र चिकित्सालय

-सीएचसी मड़ियाहूं

-सीएचसी मछलीशहर

-सीएचसी बदलापुर

-सीएचसी केराकत

चिकित्सक के अभाव में नहीं शुरू हुआ आपरेशन

जनपद के शाहगंज तहसील में लेंस प्रत्यारोपण के लिए केंद्र नहीं है। मरीजों की सुविधा के लिए शाहगंज पुरुष चिकित्सालय में विभाग द्वारा लेंस प्रत्यारोपण के लिए मशीन उपलब्ध कराई गई है लेकिन चिकित्सक न होने के कारण आपरेशन नहीं हो रहा है। परीक्षण के बाद मरीजों को बदलापुर या जिला मुख्यालय भेजकर लेंस प्रत्यारोपण कराया जाता है।

लेंस प्रत्यारोपण को मात्र 450 रुपये बजट

राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत मुफ्त लेंस प्रत्यारोपण के लिए मात्र 450 रुपये बजट निर्धारित किया गया है। इसमें 57 रुपये में लेंस खरीदा जाता है। बाकी चश्मा, दवा आदि पर खर्च होता है। लेंस प्रत्यारोपण के लिए तय बजट में विगत दस साल से वृद्धि नहीं की गई है। प्राइवेट अस्पतालों में जहां तीन से दस हजार रुपये लेंस का लिया जाता है वहीं स्वास्थ्य विभाग 57 रुपये का लेंस मरीजों को लगा रहा है। यह लेंस कितना कारगर होगा सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत शिविर लगाकर निर्धारित केंद्रों पर नियमित लेंस प्रत्यारोपण किया जा रहा है। अनुबंध खत्म होने के कारण फर्म द्वारा अक्टूबर माह से लेंस की आपूर्ति नहीं की जा रही है लेकिन पहले से बचे लेंस से काम लगाया जा रहा है। शाहगंज में नेत्र सर्जन की नियुक्ति के लिए शासन को पत्र लिखा गया है वहीं जिला अस्पताल में फेंके विधि से आपरेशन हेतु फोल्ड लेंस की खरीद के लिए आरसी नहीं जारी की गई है।

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