मुंबई (संवाददाता)। मुंबई में आए दिन रेल कि चपेट में आने से ब़डी संख्या में लोगों को अपनी जान से हाथ धोना प़ड रहा है। रेलवे कि लचर व्यवस्था और लापरवाही के चलते यह सिलसिला कई सालों से चला आ रहा है, ऐसे में सवाल उठता है कि यह सिलसिला कब थमेगा और इस घटना का जिम्मेदार कौन है। उपनगरीय रेलवे और लंबी दूरी की ट्रेनों की चपेट में आने से मुंबई में रोजाना करीब १० से अधिक लोगों की जान चली जाती है। यह दुर्घटना कभी यात्रियों की गलती या रेलवे की लापरवाही से सामने आती हैं, ऐसी ही एक दुर्घटना शनिवार दोपहर १२.४० बजे पश्चिम रेलवे के उपनगरीय लाइन पर घटी, जिसमें तीन महिलाओं की मौत हो गई जबकि एक महिला गंभीर रुप से घायल हो गई।
मृतक महिलाओं में अनीता भैयालाल शिंदे (३२), जया राजु खटवासे (३५) और शिवानी गजानन, भोर्या लाल (१८) है। दुर्घटना में घायल सुनीता गजानन भौर्यालाल (३५) का शताब्दी अस्पताल में इलाज चल रहा है, मृतक मध्यप्रदेश की रहने वालौ थीं और रेलवे में ठेकेदार के अंदर मजदूरी का काम कर रही थी। ये सभी महिलाएं जैन इंटरप्राइजेज कंपनी के अधीन ट्रैक साफ करने का काम कर रही थी। इनके ठेकेदार का नाम बसंतकुमार तथा सुपरवाइजर का नाम हेमंतकुमार बताया गया है।
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी रविन्द्र भाकर कहा कि प्राथमिक जानकारी में महिलाअपं के पटरी पार करने की बात सामने आई। लेकिन आगे की छानबीन में अगर ठेकेदार की लापरवाही सामने आई तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि ठेकेदार, मजदूरों को काम पर रखने से पहले बीमा कराते हैं और इन महिलाओं का भी बीमा है जिसे दिलाने में पश्चिम रेलवे पी़डितों की मदद करेगी।
प्राथमिक जानकारी के मुताबिक राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने इस दुर्घटना की वजह पटरी पार करना बताया है और एक्सीडेंटल डेथ के तहत केस दर्ज किया है। जीआरपी के अनुसार दुर्घटना मालाड-गोरेगांव स्टेशनों के बीच पांचवी लाइन पर हुई। दोपहर को काम खत्म करने के बाद चारों महिलाएं और चार पुरुष मालाड स्टेशन से ट्रेन पक़डने के लिए जा रहे थे। दोपहर १२.१५ बजे के करीब बांद्रा-मेरठ हॉलिडे स्पेशल ट्रेन पांचवी लाइन से गुजरी, ट्रेन गुजर जाने के बाद महिलाएं पांचवी लाइन पर चलने लगीं लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उसी लाइन पर बांद्रा-इंदौर उक्सप्रेस भी आ रही है और चारो ट्रेन क्रमांक ०९०२३ बांद्रा-इंदौर की चपेट में आ गई।
१० साल में ४६ मौत
पश्चिम रेलवे मार्ग पर मुंबई विभाग में काम करते हुए। काम से वापस जाते हुए। एक्सप्रेस और लोकल और ओएचई के चपेट में आने से पिछले १० सालों में करीब ४६ लोगों की मौत हुई है। पश्चिम रेलवे मजदूर संघ के विभागिय सचिव अजय सिंह ने बताया कि ४६ लोगों में से ३८ मजदूर और ट्रैकमैन हैं। ठेकेदारी पर काम करने वाले मजदूरों की मौत हो जाने पर रेलवे की तरफ से कोई मदद नहीं दी जाती है। मजदूरों को ठेकेदारों की तरफ से नुकसान भरपाई की जाती है या नहीं इस बारे में भी रेलवे को ध्यान देना चाहिए।


