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मिथिलांचल का प्रसिद्ध सामा चकेवा पर्व शुरू लोक पर्व ’ शाम होते हीं सामा खेलने लगती हैं बहने ’ भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व है सामा-चकेबा

मुंबई (संवाददाता) | मिथिलांचल अपनी लोक संस्कृति, पर्व-त्योहार एवं अक्षुण्न पुनीत परंपरा के लिए प्रसिद्घ रहा है। इसी कड़ी में भाई-बहन के असीम स्नेह का प्रतीक लोक आस्था का पर्व सामा-चकेबा है। आस्था का महापर्व छठ समाप्त होने के साथ ही भाई बहनों के अटूट स्नेह एवं प्रेम का प्रतीक सामा-चकेबा पर्व की शुरुआत हो चुकी है। ग्रामीण क्षेत्रों का चप्पा-चप्पा सामा-चकेबा की गीतों से अनुगूंजित है। मिथिलांचल में भाईयों के कल्याण के लिए बहना यह पर्व मनाती है। पर्व की समाप्ति कार्तिक पूर्णिमा के दिन होगी। पर्व के दौरान बहनें सामा, चकेबा, चुगला, सतभईयां को चंगेरा में सजाकर पारंपरिक लोकगीतों के जरिये भाईयों के लिए मंगलकामना करती है। संध्याकाल-छाऊर छाऊर छाऊर, चुगला कोठी छाऊर भैया कोठी चाऊर.. तथा साम चके साम चके अबिह हे, जोतला खेत मे बैसिह हे.. तथा भैया जीअ हो युग युग जीअ हो़. सरीखे गीत के साथ जब चुगला दहन करती है तो वह दृश्य मिथिलांचल की मनमोहक संस्कृति की याद ताजा कर देती है। कार्तिक शुक्ल पंचमी से प्रारंभ होकर पूर्णिमा तक यह पर्व मनाया जाता है। माहात्म्य से जुड़ी इस पर्व के सम्बन्ध में कई किंवदंतियां है। अलबत्ता जो भी हो मिथिलांचल में भी तेजी से बढ़ रही बाजारवादी एवं शहरीकरण के बावजूद यहां के बासिंदे अपनी संस्कृति को अक्षुण्न बनाये हुए हैं। गीतों से गांव की गलिंया गुलजार होने लगी है। यह खेल पूर्णिमा तक चलता है। मालूम हो कि सामा खेलने वाली सभी बहने इस पर्व की तैयारी स्वंय करती है। वे मिट्टी से सामा, चकेवा, वृन्दावन, सतभईयां,चुगला आदि की छोटी- छोटी मूर्तियां बनाते है। फिर इसे एक डाला में सजा कर संध्या के समय अलग -अलग टोलियों में एक निश्चित जगह पहुंचती है। भाई बहनों के पवित्र प्रेम व सच्चई की जीत वाली इस खेल से एक बड़ा संदेश जाता है। बहने काफी उत्साहित हो इस खेल को खेलती है। अंत में चुगला को झुलसा कर हर दिन इसका समापन करती है। समापन पूर्णिमा के दिन होता है। इस मौके पर भाई अपने बहनों के डालों को बेहतरीन ढंग से सजाती है। बहने सामा को सनेश के रूप में मुरही,चूड़ा,बतासा, ठेकुआ,केला आदि देती है। इस तरह पूर्णिमा के दिन विसजर्न के बाद यह पर्व सम्पन्न हो जाता है। अंतिम दिन बहने चकेवा की मूर्ति करे अपने भाई के ठेहुना पर तोड़ कर सभी को जल में विसजिर्त करती है।

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