खागा (सं. भा.) : 1994 का वर्ष था तब हरदों ग्रामसभा में खागा सीएचसी की आधारशिला रखी गई थी। आसपास के 30 गांवों के लोगों ने सोचा था कि अब बीमारी की दशा में समय पर अच्छा उपचार मिलेगा। शुरुआती कुछ वर्षों तक सीएचसी की सेवाएं बेहतर रहीं। अब बीते दो दशक से स्वास्थ्य सेवाओं में गिरावट देखी जा रही है। मौजूदा समय में स्थिति यह है कि मामूली इलाज के बाद मरीज को जिला अस्पताल या उच्च अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है।
तहसील मुख्यालय, नेशनल हाईवे तथा प्रमुख सरकारी कार्यालयों की वजह से सीएचसी को एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) का दर्जा दिया गया। वर्ष 2014 तक सीएचसी में अधीक्षक समेत कई विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती रही। धीरे-धीरे करके विभाग ने विशेषज्ञ डाक्टरों को जिला अस्पताल, ट्रामा सेंटर या फिर गैर जनपद भेज दिया। एमबीबीएस चिकित्सकों के सहारे सीएचसी में ओपीडी व इमरजेंसी सेवाएं दी जा रही हैं। परिसर में ही करोड़ों की लागत से तैयार हुए महिला अस्पताल का संचालन वर्ष 2019 में शुरू तो करा दिया गया, स्टाफ की तैनाती को लेकर शासन ने गंभीरता नहीं दिखाई। अक्टूबर 2020 तक यहां महिला सर्जन की तैनाती रही। संविदा का समय समाप्त होने के बाद उन्हें हटा दिया गया। 28 वर्ष पुरानी इमारत में जोखिम स्टाफ और संसाधन की कमी से जूझ रहे अस्पताल की इमारत भी बेहद जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। बरसात के दिनों में ओपीडी, दवा वितरण कक्ष तथा इमरजेंसी कक्ष की छतों से पानी टपकता है। चिकित्सकों के लिए बने आवास की हालत भी खराब हो चुकी है। निजी खर्च से मरम्मत के बाद चिकित्सक सरकारी आवास की सुविधा ले पाते हैं। फार्मासिस्ट, आपरेटर व अन्य कर्मियों के लिए 12 आवास भी जर्जर हो चुके हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए बने नौ आवास तो इस कदर कंडम हो चुके हैं। इनमें एक रात बिताने में स्वास्थ्य कर्मी घबरा रहे हैं। यहां न ठहरकर वह किराए के कमरों में रहते हैं। मौजूद संसाधन एक्स-रे, आपरेशन थियेटर, आक्सीजन सिलिडर, दो आक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन व अन्य इमरजेंसी उपकरण। चिकित्सकों की स्थिति
सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. यूपी कुशवाहा के अलावा चार एमबीबीएस चिकित्सक मौजूद हैं। जबकि शिशु रोग, हड्डी रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, सर्जन, फिजीशियन, बेहोशी के डॉक्टर नहीं हैं। नतीजा यह है कि इन डॉक्टरों की जरूरत वाले रोगियों को तुरंत रेफर कर दिया जाता है। उपचार की दिक्कतें, ग्रामीणों की जुबानी
खागा सीएचसी में भगवान भरोसे ही स्वास्थ्य सेवाएं चल रही हैं। कई बार मरीजों को समय पर डॉक्टर नहीं मिल पाते हैं। रात में डॉक्टर मिलना मुश्किल रहता है।
मोहित त्रिवेदी, हरदों सीएचसी में काम चलाऊ दवाएं ही मिलती हैं। रोग की गंभीरता दिखाई पड़ते ही चिकित्सक मरीज को जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं। मैं खुद एक बार इसका शिकार हो चुका हूं।
प्रेम गुप्ता विजयनगर छोटे बच्चों को बीमार होने पर फतेहपुर ले जाने के सिवाय कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता है। कई बार शिशु रोग विशेषज्ञ की तैनाती की मांग रखी गई। कोई सुनवाई नहीं होती है।
शीबू खान, किशुनपुर रोड खागा महिला डॉक्टर न होने पर इधर-उधर भागना पड़ता है। प्रसव पीड़ित महिलाओं को सब कुछ ठीक रहा तो प्रसव हो जाता है। जरा मुश्किल देखते ही स्टाफ नर्स रेफर कर देती हैं।
बाबूलाल, जशराजपुर हमारे पास जो मैनपावर और संसाधन हैं हम उन्हीं पर अस्पतालों को संचालित कर रहे हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की मांग की गई है मिलने पर हरदों सीएचसी में तैनाती दी जाएगी। मेरी नजर हमेशा ही यहां की सुविधाएं रहती है। सुधार के प्रयास भी जारी है।


