भायंदर (सं. भा.)। पर्यावरण संतुलन मे पेड़ों की महत्वपूर्ण भुमिका होती है जो इंसान को फल और छाया देने के साथ प्राणदायिनी ऑक्सीजन भी उपलब्ध कराते है। यही नही पेड़ों की वजह से बर्षात भी होती है। पिछले कुछ दशकों मे जिस तरह से वन क्षेत्र की अंधाधुंध कटाई हुई है और शहरीकरण के चलते पृथ्वी का कांकृटीकरण किया जा रहा है। उससे धरती का तापमान बढ़ता जा रहा है। भूमंडलीय ऊष्मीकरण (ग्लोबल वार्मिंग) के खतरे को कम करने के लिए पेड़-पौधे लगाने पर काफी जोर दिया जा रहा है। हरियाली के लिए हर वर्ष काफी पैसे भी खर्च किये जाते हैं। हालांकि इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के लिए हर वर्ष बड़े पैमाने पर पेड़ काट भी दिए जाते हैं, लेकिन सरकारी उदासीनता के चलते उसकी तुलना में वृक्ष नहीं लग पाते हैं। कुछ ऐसा ही मीरा-भायंदर में सामने आया है।
दहिसर-भायंदर मेट्रो मार्ग-९ के निर्माण के लिए हरे भरे १६६ पेड़ काटे गए हैं और काटे जाने हैं। नियमत: एक पेड़ के बदले ५ पेड़ लगाने होते हैं, लेकिन जब जगह ही नमिले तो भला पेड़ कहां लगाए जाएंगे? यह हम नहीं, बल्कि एमएमआरडीए कह रहा है। महाराष्ट्र प्रदेश असंगठित कामगार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष (माथाडी समन्वयक) नवनाथ पवार को दिए जवाब पत्र में एमएमआरडीए ने कहा कि मीरा-भायंदर मनपा द्वारा जगह उपलब्ध कराने के बाद पेड़ लगाए जाएंगे। जबकि मेट्रो मार्ग निर्माण का काम शुरु हुए करीब डेढ़ साल बीत चुके हैं।
एमएमआरडीए ने जवाब में कहा कि मेट्रो मार्ग -९ में आ रहे २१० में से १६६ पेड़ काटे जा चुके हैं। १ पेड़ के बदले ५ पेड़ लगाने के नयिम के अनुसार १०५० पेड़ लगाये जाने है। उसमें से २७५ पेड़ लगाए जा चुके हैं। बाकी पेड़ मीरा-भायंदर मनपा द्वारा जगह मुहैया कराने के बाद लगाए जाएंगे। इसी तरह ११९० में से ८८६ पेड़ को पुन: रोपित किया गया है।


