- भूस्खलन की चपेट में आने का था डर
ठाणे(सं.भा.): मुंबई सहित आसपास के जिलों में पहाड़ियों पर अवैध झोपड़े बड़े पैमाने पर बनाये गए हैं। मानसून के दौरान होने वाले भूस्खलन की चपेट में इन में से कई झोपड़े आ जाते हैं और लोगों की जान भी चली जाती है। इसी को ध्यान में रख कर भूस्खलन वाले क्षेत्रों में अवैध रूप से बनाये गए झोपड़ों पर वन विभाग द्वारा लगतार करवाई की जा रही है। कलवा के इलठाण पाड़ा स्थित परिसर में अवैध रूप से बनाये गए 40 झोपड़ों को वन विभाग ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। मानसून के दौरान झोपड़ों के आसपास भूस्खलन की आशंका जताई जा रही थी।
उल्लेखनीय है कि कलवा के पहाड़ी क्षेत्रों के आसपास अनेक झोपड़े अवैध रूप से बनाये गए है। मानसून के दौरान प्रतिवर्ष इन परिसरों में भूस्खलन तथा पत्थरों के खिसने की घटनाएं लगतार होती रहती रहती हैं। पिछले वर्ष भूस्खलन की चपेट में आकर एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत हो चुकी थी। ऐसे क्षेत्रों को मनपा ने भी खतरनाक घोषित कर निवासियों को घर खाली करने की नोटिस दिया हुआ है। दूसरी तरफ वन विभाग की जमीन पर अवैध रूप से बने झोपड़ों पर वन विभाग की तरफ से करवाई शुरू कर दी गई है। वन परिक्षेत्र अधिकारी नरेंद्र मुठे ने बताया कि मानसून के दौरान नागरिकों को किसी तरह की दुर्घटना से बचाने के लिए खतरनाक क्षेत्रों में मौजूद झोपड़ों पर करवाई करने के आदेश दिए गए है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को उप वन संरक्षक संतोष सस्ते तथा सहायक वन संरक्षक गिरिजा देसाई के मार्गदर्शन में 40 झोपड़ों को जमीदोंज कर दिया गया है। वन विभाग की जमीन पर अवैध रूप से झोपड़े बनाना गुनाह है। जानकारी मिलने के बाद करवाई की जाती है। इलठाणपाडा पहाड़ी के ढलान पर कुछ लोगों द्वारा झोपड़ा बनाने और उसमें निवास करने की जानकारी मिली थी। यह स्थान भूस्खलन तथा पत्थर गिरने की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। किसी तरह के जानमाल के नुकसान से बचाने के लिए यह करवाई की गई है।
मानसून पूर्व वन विभाग ने तोड़े 40 झोपड़े
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