चार दीवारों के मकान को घर कहते है
ज़िंदगी की थमी रफ़्तार ने सिखाया है
मानों घर की तोरण से लेकर गार्डन बनी बालकनी तक ताने दे रही हो|
देर सही पर वक़्त तो मिला
अपने घर में क्या कहा रखा है
ज़ज्बातों से समेटे सामान को धुल से हटा
चल ठीक है अगर कुछ समय ज़िंदगी की रफ़्तार रुक गयी है तो
अपनी यादों का पिटारा खोल लें
दोस्ती के नाम पर जो पीछे रह गए
आज उनसे रूबरू हो ले
ऐसा नहीं है कि ये बुरा वक़्त नहीं बदलेगा
पर हाँ अब घर आ ही गयी है
तो दफ्तर से ज्यादा किताबों में ज़िंदगी ढूंढ़ना
कुछ दिन लैपटॉप से नहीं कलम से अपनी बाते करना
हाँ चार दीवारों के घर को चार दीवारों के मकान को घर कहते है
ज़िंदगी की थमी रफ़्तार ने सिखाया है
पूजा मिश्रा


