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प्रदूषण जांच पर बढ़ा खर्च, वाहन मालिकों की जेब होगी ढीली

मुंबई, (सं.भा.) वाहन मालिकों के लिए जरूरी प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र अब पहले से महंगा हो गया है। महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने वाहनों की श्रेणी और ईंधन के प्रकार के आधार पर प्रदूषण जांच के शुल्क में बढ़ोतरी करते हुए नई दरें लागू की हैं। इससे दोपहिया से लेकर डीजल वाहनों तक के मालिकों को अब अधिक राशि चुकानी होगी।

नई दरों के अनुसार दोपहिया वाहनों के लिए 60 रुपये, पेट्रोल तिपहिया वाहनों के लिए 120 रुपये, पेट्रोल, सीएनजी और एलपीजी वाहनों के लिए 140 रुपये तथा डीजल वाहनों के लिए 180 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

इससे पहले दोपहिया वाहनों के लिए 50 रुपये, पेट्रोल तिपहिया वाहनों के लिए 100 रुपये, पेट्रोल, सीएनजी और एलपीजी वाहनों के लिए 125 रुपये तथा डीजल वाहनों के लिए 150 रुपये शुल्क लिया जाता था। यानी नई दरों में क्रमशः 10, 20, 15 और 30 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

महाराष्ट्र राज्य प्रदूषण जांच केंद्र संचालक संघ की ओर से शुल्क बढ़ाने की मांग के बाद परिवहन विभाग ने यह फैसला लिया है। विभाग ने विभिन्न राज्यों में लागू प्रदूषण जांच शुल्क, नियमों और परीक्षण प्रक्रिया का अध्ययन करने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति की सिफारिशों और अदालत के निर्देशों के आधार पर संशोधित दरों को मंजूरी दी गई।

परिवहन विभाग ने सभी प्रदूषण जांच केंद्रों को संशोधित शुल्क की सूची प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही केंद्र संचालकों को निर्धारित राशि से अधिक शुल्क वाहन मालिकों से नहीं लेने की हिदायत दी गई है। शुल्क तय करते समय परीक्षण उपकरणों की लागत, कर्मचारियों के पारिश्रमिक और वाहनों के प्रकार को भी ध्यान में रखा गया है।

वहीं, वाहन मालिकों का कहना है कि ईंधन, बीमा, टोल और वाहन रखरखाव का खर्च पहले ही लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्रदूषण जांच शुल्क में बढ़ोतरी से आम वाहन चालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। वाहन चालकों ने सरकार से सड़कों की खराब स्थिति और गड्ढों के कारण वाहनों को होने वाले नुकसान पर भी ध्यान देने की मांग की है।

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