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प्रेम

लोग कहते हैं

प्रेम जीवन है

पर विष बन

आहिस्ता

जीवन लेता है

प्रेम सदैव

सुधा बन

वर्षे ऐसा

नही

वो जीवन में

विष भी बोता है

जैसे भोजन

जीवन देता है पर

मृत्यु से निकटता

भी लाता

आहिस्ता

वैसे ही प्रेम

भी विष बोता है

जैसे हर लम्हा

जीवन मृत्यु संग

चलता

वैसे ही प्रेम

भी जीवन और

कया क्षरण का

कारण बनता है

प्रेम का प्याला

पिया जिसने भी

इस बात को वो

मानता है

प्रेम जान लेना

जनता है

निवेदित रश्मि छपरा , बिहार

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