मुंबई (सं. भा.)। उत्तर भारत में शादी का मौसम इन दिनों शुरु हो चुका है। लगभग हर उत्तर भारतीय परिवार अपने नात-रिश्तेदारों के घर में होने वली शादी समारोह में शामिल होना चहता है।सब से बडी समस्या उनके सामने जो बनी है वह टिकीट पाने की है।उत्तर भारत की ओर जानेवाली लंबी दूरी की ट्रेनों के टिकटों की मारा-मारी चल रही है। लाख कोशिशों के बावजूद गांव जाने का टिकट रेल यात्रियों की पहुंच से बाहर है। जैसे-जैसे गांव जाने का समय नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे रेल यात्रियों के दिलों की धड़कने भी बढ़ने लगी है। ऐसे मे टिकीट के लिए परेशान यात्री रेल मंत्री पियूष गोयल से गुहार लगाते रहे हैं कि हमका टिकीट दिलाई दो गोयल जी काईसे जाईं गांव ।
बता दे कि गर्मी की छुट्टीयों को देखते हुए रेलवे ने ‘सुविधा’ ट्रेनें चलाई है, लेकिन इसकी किराया काफी महंगा होने से सामान्य यात्री इस ट्रेन से दूरी बनाने में ही अपनी समझदारी दिखा रहे हैं। यात्री कविता साहनी का कहना है कि ‘सुविधा’ के स्लीपर का किराया ढाई हजार के पार बता रहा है इतने किराए में दो लोग गांव पहुंच जाएंगे। रेलवे, बुलेट,ट्रेन और हारपरलूप ट्रेन चलाने की योजना बना रही है। इस ट्रेन में कौन जाएगा? रेलवे को अपने मौजूदा रेल ढांचों को अपग्रेड करनर की जरुरत है ताकि अधिक ट्रेंनो को चलाया जा सके, वहीं सामाजिक परिवर्तन फाउंडेशन के अध्यक्ष राजकिशोर तिवारी का कहना है कि यात्री किराया देने को तैयार है लेकिन रेलवे सुविधा देना नही चाहती। इन दिनों गोरखपुर, आजमगढ़ वाराणसी और लखनऊ रुट पर जानेवाली ट्रेनों की काफी डिमांड है लेकिन रेलवे ट्रेन सेवा मुहैया नहीं करा पा रही है। रेलवे इन रुटों पर अनारक्षित स्पेशल ट्रेनें भी चला दे तो यात्रियों को काफी राहत होगी। गौरतलब है कि गांव जाने का टिकट न मिलने से इन दिनों रेल यात्री काफी परेशान है


