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Homeउत्तर प्रदेशपरंपरागत खेती को छोड़ किया अंजीर की खेती।

परंपरागत खेती को छोड़ किया अंजीर की खेती।

  •  किसान ने लाखों का कमाया मुनाफा।

फतेहपुर (सं. भा.) फ़तेहपुर के मवई पाठकपुर गांव निवासी सर्वेश चन्द्र मिश्र एकमात्र ऐसे किसान है जिन्होंने अंजीर की खेती शुरू कर जनपद में मिसाल पेश की हैं। जो कम लागत में लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं। पारंपरिक खेती से हटकर अफगानी प्रजाति की अंजीर की खेती के लिए किसान को वन विभाग की ओर से एक एकड़ में 90 हज़ार 600 का अनुदान भी मिला है। इस फसल को तैयार करने में केवल गोबर की खाद का प्रयोग किया जाता है। प्रोसेस सिस्टम के तहत फलों को पकाया जाता है जो मार्केट में 700 से 800 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिकता है। जानकारी के मुताबिक फ़तेहपुर जनपद प्रयागराज मण्डल का अकेला जनपद है जहाँ अफगानी अंजीर की खेती हो रही है। जनपद के अन्य किसान भी लहलहाते अंजीर के पौधें देखकर आकर्षित हो रहे है और इसकी खेती की ओर रुझान बढ़ा रहे है।

किसान सर्वेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि नवाचार के रूप में एक एकड़ क्षेत्रफल में अंजीर की खेती शुरू किया है। यह अफगान डायना प्रजाति की अंजीर है जो एक बार लगाने के बाद 15 से 20 साल तक लगातार पैदावार देता है। इस खेती के लिए वन विभाग की ओर से 90 हज़ार 600 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी गयी है ताकि अन्य किसानों का रुझान बढ़े। इस अफगान प्रजाति की अंजीर से किसान को एक एकड़ में प्रतिवर्ष सात लाख से पंद्रह लाख तक की आमदनी होती है। साथ ही अंजीर का पेड़ आयुर्वेद का भंडार माना जाता है इसके फल, पत्ती, तना औषधीय दृष्टिकोण से लाभप्रद है। शुरुआती दिनों में अंजीर के एक पौधें से 3 से 5 किलो फल प्राप्त होते हैं जो बाद में एक पौधे से ही 10 से 20 किलो तक फल पैदा होते हैं।

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