सहायक अभियंता प्रशांत मांजरेकर
- मनपा आर/दक्षिण वार्ड में प्रधानमंत्री स्वच्छता अभियान की उड़ाई जा रही है धज्जियां
- आर/ दक्षिण वार्ड में ही सालों से डटे पड़े हैं अभियंता मांजरेकर
मुंबई (सं. भा.) : 2014 में जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तब सबसे पहले उन्होनें देश में स्वच्छता पर जोर दिया। देशवासियों को प्रेरित करने के लिए वे खुद हाथ में झाड़ू लेकर सड़क पर उतरे थे। प्रधानमंत्री का इसके पीछे स्पष्ट संदेश है कि स्वच्छ भारत से ही स्वस्थ भारत बन सकता है। मुंबई जैसे महानगरों में शहर को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी महानगर पालिका के कंधे पर है। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान की धज्जियां मनपा के घनकचरा विभाग द्वारा लगभग प्रत्येक वार्ड में उड़ाया जाता है जिसमें कांदिवली का आर / साउथ वार्ड भी शामिल है। इस वार्ड के घनकचरा विभाग के सर्वे सर्वा हैं सहायक अभियंता प्रशांत मांजरेकर। मांजरेकर की देख रेख में ही पूरे कांदिवली परिसर में प्रधानमंत्री स्वच्छता अभियान की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जाती है। यही नही आर/ साउथ वार्ड के अंतर्गत कहां साफसफाई हुई है, कहां नही हुई है, हुई है तो सही तरीके से हुई है या नही हुई है साथ ही आम लोगों को स्वच्छता को लेकर जागृत करने के लिए ‘ स्वच्छता दूत’ की नियुक्ति घनकचरा विभाग के सहायक अभियंता द्वारा अपने स्तर पर किया जाता है। जब से ‘ स्वच्छता दूतों ‘ को नियुक्त करने का आदेश मनपा आयुक्त द्वारा दिया गया है तब से लेकर अभी तक आर / साउथ वार्ड में घनकचरा विभाग के सहायक अभियंता प्रशांत मांजरेकर द्वारा कितने ‘ स्वच्छता दूत ‘ नियुक्त किए गए हैं इसका कोई हिसाब नही रखा जाता है।

आर/ साउथ वार्ड के ही कुछ अधिकारियों का कहना है कि ‘ स्वच्छता दूत ‘ की नियुक्ति सहायक अभियंता मांजरेकर के लिए काली कमाई का जरिया बन गया है। मनपा कर्मचारियों का यह भी कहना है कि जब से मांजरेकर आर/ साउथ वार्ड में आए हैं तब से लेकर अभी तक स्वच्छता दूत का टेंडर किन किन संस्थाओं को दिए गए हैं, उन संस्थाओं ने कितने स्वच्छता दूत नियुक्त किए हैं। साथ ही उन स्वच्छता दूतों के बैंक खातों की जांच इमानदारी से की जाए तो सहायक अभियंता मांजरेकर के काली कामाई रुपी भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है। कचरे से होने वाली काली कमाई के चलते ही मांजरेकर वर्षों से आर/ साउथ वार्ड में जमें हुए हैं। आर/ साउथ वार्ड के सूत्रों कि माने तो मांजरेकर अपने सेटिंग के बल पर एक- दो महीने के लिए दूसरे वार्ड या विभाग में ट्रांसफर ले लेते हैं और फिर कचरे की काली कमाई के बल पर सेटिंग कर वापस आर/ साउथ वार्ड में ट्रांसफर करवा लेते हैं। मजे की बात यह है कि आर/ साउथ वार्ड में आते ही उनकी नियुक्ति घनकचरा विभाग में हो जाता है। आर/ साउथ वार्ड के घनकचरा विभाग से जुड़े कुछ अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि इस विभाग में कुछ टेंडर सीधे निकाले जाते हैं जो सहायक अभियंता मांजरेकर के हाथों में होता है। ऐसे में मांजरेकर अपनी मनमानी करते हुए उन टेंडरों को अपने पसंद के लोगों को सीधे तौर पर दे देते हैं। इस तरह लगभग 5 से 6 साल से आर/ साउथ वार्ड में जमें रहने वाले सहायक अभियंता मांजरेकर प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान को ठेंगा दिखाते हुए कचरे की काली कमाई में आकांठ डूबे हुए हैं।


