बोरीवली (सं. भा.) : मुंबई में निजी जमीन पर बनी झोपड़ियों/चालों की प्रथम मंजिल पर रहने वाले निवासियों को उनके अधिकार का पक्का घर मिले, इस महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर उत्तर मुंबई के पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी अब सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर चुके हैं।
गौरतलब है कि माननीय उच्च न्यायालय ने हाल ही में निजी जमीन पर बनी चालों की प्रथम मंजिल के निवासियों को खुद का पक्का घर
दिलाने संबंधी जनसेवक गोपाल शेट्टी की याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद, उन्होंने इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाने का दृढ़ निश्चय कर लिया है और इसके लिए आवश्यक पूर्व तैयारी भी कर ली है।
जनसेवक गोपाल शेट्टी के अनुसार, मुंबई की निजी जमीन पर बनी पुरानी चालों के निवासियों को भी निःशुल्क या सशुल्क घर दिए जाने का वे हमेशा समर्थन करते रहे हैं। उनका मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की संकल्पना के तहत इन नागरिकों को भी अपने खुद के पक्के मकान में स्वाभिमानपूर्वक जीवन जीने का पूरा अधिकार है। इसी संदर्भ में उन्होंने माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसे हाल ही में खारिज कर दिया गया। अब, वे इस मामले को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत कर न्याय सुनिश्चित करवाने का संकल्प ले चुके हैं।
जनसेवक गोपाल शेट्टी का कहना है कि निजी जमीन पर बनी चालों के प्रथम मंजिल के निवासियों को भी या तो निःशुल्क अथवा सशुल्क आवास प्रदान किया जाना चाहिए, या फिर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। लेकिन उनकी अनदेखी होती आई है।
उल्लेखनीय है कि इसी मुद्दे पर जनसेवक गोपाल शेट्टी ने राज्य सरकार और एसआरए (झुग्गी झोपड़ी पुनर्वसन प्राधिकरण) को कई पत्र लिखकर तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से बार-बार मिलकर इन निवासियों के प्रति सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की मांग की थी। एसआरए ने तब स्पष्ट कहा था कि केवल 1 जनवरी 1976 तक की चालों और झुग्गियों को ही पुनर्वास का लाभ दिया जा सकता है, लेकिन प्राइवेट जमीन पर की चालों की प्रथम मंजिल के निवासियों के लिए यह सुविधा इसमें शामिल नहीं थी।
इसी के खिलाफ जनसेवक गोपाल शेट्टी ने पहले उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी और अब सर्वोच्च न्यायालय में इस मुद्दे को ले जा रहे हैं।


