मुंबई (सं.भा.) चर्चगेट-विरार उपनगरीय रेल मार्ग पर अवैध फेरीवालों की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए पश्चिम रेलवे नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित योजना के तहत लोकल ट्रेनों में 40 अधिकृत गैर-खाद्य (नॉन-कैटरिंग) विक्रेताओं को लाइसेंस और पहचान-पत्र के साथ बिक्री की अनुमति दी जाएगी। रेलवे का मानना है कि इससे अवैध फेरीवालों पर प्रभावी नियंत्रण होगा, यात्रियों के लिए अधिकृत विक्रेताओं की पहचान आसान बनेगी और रेलवे की आय में भी बढ़ोतरी होगी। हालांकि, रेलवे ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस योजना पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था के तहत चयनित विक्रेताओं को पहचान-पत्र और अधिकृत लाइसेंस जारी किए जाएंगे। इन्हें लोकल ट्रेनों में पेन, रुमाल, पत्रिकाएं, मोबाइल एक्सेसरीज, खिलौने तथा अन्य गैर-खाद्य वस्तुएं बेचने की अनुमति दी जाएगी। योजना लागू होने के बाद अवैध फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई करना अधिक आसान होगा, क्योंकि अधिकृत और अनधिकृत विक्रेताओं की स्पष्ट पहचान हो सकेगी।
सूत्रों के मुताबिक पश्चिम रेलवे इस योजना को लागू करने की दिशा में प्रारंभिक स्तर पर विचार कर रहा है और इसे अमल में आने में लगभग चार महीने का समय लग सकता है। हालांकि, पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक ने कहा कि फिलहाल अधिकृत नॉन-कैटरिंग विक्रेताओं की नियुक्ति को लेकर कोई औपचारिक योजना या निर्णय नहीं लिया गया है।
गौरतलब है कि हाल ही में मध्य रेलवे ने लोकल ट्रेनों में 100 अधिकृत फेरीवालों को अनुमति देने का निर्णय लिया था। इसके बाद अब पश्चिम रेलवे भी इसी मॉडल पर विचार कर रहा है। अधिकारियों का अनुमान है कि प्रस्ताव लागू होने पर रेलवे को हर वर्ष 25 से 27 लाख रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है।
रेलवे के अनुसार चर्चगेट-विरार मार्ग पर प्रतिदिन 20 से 25 अवैध फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। इसके बावजूद समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है। ऐसे में अधिकृत विक्रेताओं की व्यवस्था को समाधान के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर कई यात्री संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि पहले से भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेनों में फेरीवालों को अनुमति देने से यात्रियों की आवाजाही और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। ऐसे में अंतिम निर्णय से पहले सभी पक्षों की राय पर विचार किया जाएगा।


