उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र प्रारंभ हो चुका है। यह चार दिवसीय सत्र मुख्य रूप से अनुपूरक बजट, महत्वपूर्ण विधेयकों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए आयोजित किया गया है। यह 6 अगस्त 2026 तक चलेगा। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा 4 अगस्त को वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा और 6 अगस्त को इस पर चर्चा होगी।
चूंकि उत्तर प्रदेश सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड बढ़िया है, सरकार पिछले 9 साल से बहुत बेहतरीन काम कर रही है और विपक्ष टुकड़े टुकड़े में बिखरा हुआ सा है, इसलिए यह संभावना जताई जा रही है कि मानसून सत्र में विपक्षी दलों के पास तूफान खड़ा करने का कोई मौका नहीं है। लेकिन विपक्ष तो विपक्ष है। खासकर समाजवादी पार्टी- सपा, उसे राई का पहाड़ करने में महारत हासिल है। सपा के विधायकों ने विधानसभा परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सपा विधायक राम मंदिर दान चोरी, नीट पेपर लीक, आरक्षण और जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज जैसे मुद्दों को लेकर पोस्टर-बैनर और दान पेटी लेकर पहुंचे।
विधानसभा परिसर में सपा विधायकों का विरोध प्रदर्शन काफी उग्र नजर आया। कई विधायक हाथों में प्लेकार्ड और बैनर लिए दिखे, जिन पर राम मंदिर चंदा चोरी, नीट एग्जाम और जंतर मंतर लाठीचार्ज जैसे मुद्दे लिखे हुए थे। कुछ विधायक हाथ में दान पेटी लेकर पहुंचे और सरकार पर तीखे निशाने साधे।
हालांकि सत्र की शुरुआत से पूर्व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो तेवर दिखाए हैं, उसके चलते विपक्षी दलों के सामने असमंजस की स्थिति आ गई है। लेकिन सपा ने मुख्यमंत्री की अपील को नजरअंदाज किया और उसने पहले ही दिन हंगामा करने की कोशिश की।
मुख्यमंत्री के अनुसार मानसून सत्र हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सदन के समय का बेहतर उपयोग हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदेश के हित और 25 करोड़ आमजन के विकास के लिए विधानमंडल की कार्यवाही को शांतिपूर्ण ढंग से चलाने के लिए विपक्ष के साथी नकारात्मकता की राजनीति को छोड़कर प्रदेश के विकास व समृद्धि में योगदान देंगे। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विधायिका आमजन की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम होती है। संसदीय प्रणाली में विधायिका गरीब, किसान, युवा और महिला से जुड़े मुद्दों पर चर्चा, समीक्षा और परिणाम तक पहुंचाने का सबसे अच्छा प्लेटफॉर्म है। हर जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्या को रखकर सरकार से समाधान का रास्ता निकलवा सकता है। इस प्लेटफॉर्म का बेहतर उपयोग हो, यह भाजपा नेतृत्व की एनडीए सरकार की सदैव प्राथमिकता रही है।
मुख्यमंत्री की राय में गरीब, युवा, महिला व किसान से जुड़े समस्त मुद्दे डबल इंजन सरकार की प्राथमिकता में हैं और उनका समाधान होगा। मुख्यमंत्री ने राम मंदिर के चढ़ावा चोरी पर भी विरोधी दलों के नेताओं पर सवालिया निशाना खड़ा करते हुए कहा कि जो लोग अयोध्या के मुद्दे को उठा रहे हैं, उन्होंने जयश्रीराम बोलने पर रामभक्तों पर लाठी-गोली चलवाई थी। राम मंदिर के खिलाफ न्यायालय में वकीलों की फौज खड़ी करके इसे बाधित करने का कुत्सित प्रयास किया है। राम मंदिर में चंदा चोरी की बात वे लोग कर रहे हैं, जिनके जेब से मंदिर निर्माण के लिए एक पैसा भी नहीं निकला। देश-दुनिया इनका दोहरे चरित्र देख रही है और इनकी असलियत जान भी चुकी है।
योगी आदित्यनाथ के मुताबिक जिन लोगों के समय में किसानों के हितों पर कुठाराघात हुआ, जिन्होंने किसानों को खेत के लिए पर्याप्त पानी नहीं मुहैया कराया। उल्टे उनके हक पर बिचौलियों का वर्चस्व स्थापित कराया और किसानों को असुरक्षित करते हुए उनके जीवन में बदहाली लाने का पाप किया। ऐसे दोहरे चरित्र वाले लोग आज किसान की बात करके उनके जले पर नमक छिड़क रहे हैं। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जिसके तहत यूपी में 24 लाख हेक्टेयर भूमि में अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा दी गई, समेत कई योजनाएं चल रही हैं। किसान अब तीन-चार फसलें लगा रहा है। पैक हाउस के माध्यम से औद्यानिक फसलों का विभिन्न देशों में निर्यात हो रहा है।
विधानमंडल के मानसून सत्र के पहले मुख्यमंत्री एक अलग तेवर में दिखे। उन्होंने समाजवादी पार्टी-सपा को खूब खरी खोटी सुनाई। किसानों के मुद्दे पर सपा को घेरा और अपनी सरकार में गन्ना किसानों के लाभों को भी गिनाया। यह बात सही भी है क्योंकि अखिलेश यादव सरकार में किसानों की बड़ी दुर्गति हुई थी। उनका 10 साल का गन्ना मूल्य बकाया था। सपा वाले किसानों के हितों का संरक्षण करने के बजाय उन्हें आत्महत्या और पलायन के लिए मजबूर करते थे। उस समय किसानों के ट्यूबवेल तक सुरक्षित नहीं थे। जबकि उत्तर प्रदेश सरकार आज 16 लाख ट्यूबवेल को निशुल्क बिजली उपलब्ध करा रही है। कुछ जगहों पर पोर्टल की तकनीकी समस्या आई थी, लेकिन विभाग को किसानों के लिए खाद की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है।
9 वर्ष में संवाद और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों की समीक्षा करने के उपरांत बनी योजनाओं के माध्यम से ही सरकार बेहतर काम कर सकी है। इससे उत्तर प्रदेश के प्रति धारणा बदलने के साथ ही इसे बीमारू राज्य से उबारकर रेवेन्यू सरप्लस व इकॉनमी का ब्रेकथ्रू स्टेट बनाना संभव हो सका। 9 वर्षों में सरकार ने युवाओं के कल्याण, महिलाओं की सुरक्षा-सम्मान और स्वावलंबन, किसानों के जीवन में परिवर्तन और चेहरे पर खुशहाली लाने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं और वर्तमान में सरकार क्या करने जा रही है, इस पर भी चर्चा होगी।
डबल इंजन सरकार ने 9 वर्षों में छह करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से उबारकर मध्यम श्रेणी में लाकर यदि उनके जीवन में परिवर्तन लाने का प्रयास किया है तो उसकी केंद्रबिंदु विधायिका है, क्योंकि यहीं नीतियां बनती हैं। उससे पहले चर्चा-परिचर्चा होती है। विधायिका सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स, शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन, किसान, निवेश, रोजगार आदि पर चर्चा करने का भी सशक्त माध्यम है।
खेती-किसानी की दृष्टि से किसानों, स्कूल-कॉलेज में एडमिशन के लिए युवाओं और कांवड़ यात्रियों के लिए यह महीना अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवा ऊर्जा के प्रतीक जिन छात्रों ने प्रवेश लिया है और जो नए रोजगार के लिए बढ़ रहे हैं, उन सभी प्रतिभाशाली युवाओं को शुभकामनाएं। किसान जब दिनरात मेहनत करता है तो उत्तर प्रदेश की धरती सोना उगलती है। भारत की कुल कृषि भूमि में यूपी की हिस्सेदारी मात्र 11 प्रतिशत है, लेकिन हमारे किसान देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21-22 फीसदी का योगदान दे रहे हैं। किसानों के जीवन में आज व्यापक परिवर्तन हुआ है। मोदी जी के विजन के अनुरूप किसानों की आय दोगुनी से अधिक हुई है। किसानों के जीवन में खुशहाली लाने वाले अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। सीएम ने रिफॉर्म में किसानों के योगदान की सराहना भी की।
सपा को अनाधिकार चेष्टा करने की पुरानी आदत है। यह पार्टी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ सकती। लेकिन, उम्मीद की जानी चाहिए कि बाकी के तीन महत्वपूर्ण दिन बगैर किसी हंगामे के गुजरेंगे और मानसून सत्र में कोई बड़ा तूफान नहीं आएगा। और सत्र अपेक्षा के अनुरूप शांति से संपन्न हो जाएगा।


