मुंबई (सं.भा.): भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ते तनाव और बदलती जीवनशैली के बीच योग आज स्वस्थ और संतुलित जीवन का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर देशभर में लाखों लोगों ने योगाभ्यास कर स्वस्थ भारत का संकल्प दोहराया। मुंबई में भी विभिन्न स्थानों पर बड़े पैमाने पर योग शिविरों का आयोजन किया गया, जहां जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
मालाड पश्चिम स्थित दाना-पानी बीच पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की उपस्थिति में सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया। समुद्र तट पर आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने हिस्सा लेकर योग के प्रति अपनी आस्था और जागरूकता का परिचय दिया।
इस अवसर पर पीयूष गोयल ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की एक अमूल्य धरोहर है, जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करने का कार्य करती है। योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि एक जीवन पद्धति है, जो व्यक्ति को स्वस्थ, सकारात्मक और अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों के कारण आज योग को वैश्विक पहचान मिली है। भारत की इस प्राचीन परंपरा को दुनिया के अनेक देशों ने अपनाया है और करोड़ों लोग योग के माध्यम से स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि योग दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने में प्रधानमंत्री की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
इसी क्रम में पूर्व भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी के संयोजन में कांदिवली पश्चिम स्थित पोइसर जिमखाना में भी भव्य योग शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लेकर योगाभ्यास किया। वहीं बोरीवली के भाजपा विधायक संजय उपाध्याय और चारकोप के भाजपा विधायक योगेश सागर के नेतृत्व में भी अलग-अलग क्षेत्रों में योग शिविर आयोजित किए गए, जहां लोगों ने स्वस्थ जीवन के लिए योग को अपनाने का संकल्प लिया।
कुल मिलाकर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मुंबई सहित पूरे देश में योग शिविरों का व्यापक आयोजन किया गया। स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर लोगों ने एक साथ योगाभ्यास कर स्वस्थ, सशक्त और जागरूक भारत के निर्माण का संदेश दिया। योग दिवस के इन आयोजनों ने एक बार फिर साबित किया कि योग अब केवल भारत की परंपरा नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य आंदोलन बन चुका है।


