मुंबई (सं. भा.)। स्लम बस्ति के झोपड़ा धारकों को बिल्डिंग में फ्लैट मिल सके। उनकी नागरिक सूविधा में सूधार हो इस उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार ने एसआरए स्कीम शुरु की। वर्तमान में यही स्कीम झोपड़ा धारकों के कंगाली का सबब बना हुआ हैं। दूसरी ओर सोसायटियों के चीफ प्रमोटर, अध्यक्ष, सचिव से लेकर अन्य पदाधिकारी मालामाल हो रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला कांदिवली पश्चिम, गणेश नगर के गांधीनगर इलाके में उजागर हुआ है। यहां के ७७६ झोपड़ा धारक एसआरए के चक्कर में बुरी तरह फंसे हुए नजर आ रहे हैं।
दरअसल इन ७७६ झोपड़ा धारकों ने झोपड़पट्टी पुनर्वसन योजना (एसआरए) के तहत सिद्धिविनायक गृहनिर्माण संस्था (नियोजित) बनाई हई जिसका अध्यक्ष विजय पाल नामक व्यक्ति को बनाया गया है। जब से विजय पाल सोसायटी का अध्यक्ष बना है तब से वह अलग-अलग बिल्डरों से तोलमोल करता रहा है। ऐसा आरोप सोसायटी से जुड़े कई लोग लगा रहे हैं। इनका आरोप है कि विजय पाल अब तक यश बिल्डर एंड डेवलपर्स, मोदी स्पेस के अलावा श्रेया बिल्डर एंड डेवलपर्स के साथ एसआरए स्कीम के नाम पर तोलमोल करता रहा है। सोसायटी वालों का कहना है कि वजय पाल मोदी स्पेस बिल्डर का तीन सालों तक विरोध करता रहा। जब मोदी स्पेस का इस स्कीम से बाहर होने की संभावना बनी तो वह वापस इस बिल्डर के पक्ष मे खड़ा हो गया। विजय पास के करतूतों से सोसायटी के लोग इतने खफा हैं की अब उन लोगों का इस पर से विश्वास पूरी तरह से उठ गया है। विजय पाल ने सबसे पहले यश बिल्डर के चेतन मोदी को स्कीम से हटा दिया। फिर मोदी स्पेस के आनंद मोदी को गले लगा लिया। विजय पाल के गला काटू नीति से तंग आकर आनंद मोदी को रुपारेल बिल्डर को साथ लेना पड़ा। दरअसल मोदी स्पेस के आनंद मोदी ने विजय पाल की नीयत को समझ लिया था। इस लिए वह विजय पाल और उसकी कमेटी के पदाधिकारियों को बदल कर एसआरए स्कीम करना चाहता था। ताकि वह विजय पाल के भारी डिमांड से बच सके। विजय पाल ने भी पलटी मारते हुए मोदी स्पेस पर रुपारेल के हाथों स्कीम बेचने का आरोप लगाया। वह एसआरए, मंत्रालय सहित संबंधित विभागों में शिकायत तब तक करता रहा जब तक की मोदी स्पेस के आनंद मोदी उसके पास चल कर नही आया। इस बीच विजय पाल ने श्रेया बिल्डर एंड डेवलपर्स के शिवनारायण सिंह को भी उसने एसआरए का सब्जबाग दिखाना शुरु कर दिया था।
शिवनारायण सिंह को पर्दे के पीछे रखकर आनंद मंगल हाल में 4/11/2018 को सर्वसाधारण सभा लेकर 70%लोगो की सहमति लेकर बिल्डर आनंद मोदी की नियुक्ति रद्द कर दिया | इसके अलावा अन्य कई बिल्डरों से लुकाछिपी करता रहा | एसआरए में १४ दिसंबर २०२० तथा ४ जनवरी २०२१ में हुई सुनवाई के बाद आने वाले फैसले से पहले आनंद मोदी और विजय पाल दोनों भयभीत थे और गुपचुप समझौता कर लिए | हलांकि अभी मामला एसआरए में विचारधीन है | सोसायटी के लोगों का कहना है कि विजय पाल लंबी रकम कमाने लिए सबको कठपुतली की तरह नचा रहा है | विजय पाल बिल्डरों से आने वाले पैसे को कुछ लोगों में बांटकर बोलती बंद कर अपनी तरफदारी करवाता है | उक्त सोसायटी के कई लोग विजय पाल के रवैये से नाराज है | वे बिल्डर आनन्द मोदी और विजय पाल के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का मन बना चुके है | कुछ लोगों का कहना है कि आखिर कबतक एसआरए के तहत होने वाली स्कीम में धांधली होती रहेगी ? सरकार नियोजित सोसायटियों पर अंकुश लगाने के लिए विचार करे ताकि तोलमोल का खेल बंद हो |
सोसायटी से जुड़े लोगों पर विश्वास किया जाए तो उनका कहना है कि विजय पाल नें एसआरए स्कीम के नाम पर बिल्डरों से अब तक करोड़ों रुपए ऐंठ चुका हैं। उसने उन पैसों से लखनऊ, उन्नाव सहित मुंबई के आसपास के इलाकों में करोड़ों की प्रॉपर्टी अपने सगे-संबंधियों के नाम पर खरीद रखी हैं। ‘संगठन भारत’ के पास इस से जुड़े कई दस्तावेज हाथ लगे हैं। शिकायत किए जाने के बाद अगर जांच हुई तो विजय पाल के साथ साथ उसके परिवार वाले कानूनी रुप से बड़ी मुसिबत में फंस सकते हैं।


