मुंबई (सं. भा.) हाईकोर्ट की फटकार के बाद राज्य सरकार ने बाइक टैक्सी पर मुंबई शहर ने रोक लगा दी है। वैसे तो गोवा राज्य में जहां बाइक टैक्सी की भारी मांग है, वहीं पुणे में रिक्शा चालकों के विरोध के चलते हाई कोर्ट ने राज्य में बाइक टैक्सी पर रोक लगा दी है। इससे यात्रियों को मिलने वाली अच्छी सुविधाएं बंद हो गई। आखिरकार सरकार की नींद तब खुली जब बॉम्बे हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को बाइक टैक्सी को लेकर नीति बनाने की फटकार लगाई। सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा के नाम पर इस योजना को राज्य में बंद कर दिया है। इसलिए सवाल किया जा रहा है कि क्या इस योजना को रिक्शा चालकों के व्यवसाय के लिए बंद किया गया है। 13 जनवरी को बॉम्बे हाई कोर्ट ने रोपन ट्रांसपोर्ट सर्विसेज (रैपिडो) की मोबाइल आधारित बाइक टैक्सी सेवा को बंद करने का आदेश दिया था।
क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण ने टैक्सियों के लिए एग्रीगेटर लाइसेंस प्राप्त करने के कंपनी के आवेदन को खारिज किया। इन सभी मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट में चल रही थी। हाईकोर्ट ने सरकार को बाइक टैक्सी सेवा को बंद करने की नीति तय करने का आदेश दिया। महाधिवक्ता ने कोर्ट का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित किया कि कंपनी ने बिना लाइसेंस के एक मोबाइल ऐप के जरिए अपनी सेवा शुरू की थी, इसलिए राज्य सरकार ने इसे नागरिकों के लिए खतरनाक मानते हुए बंद कर दिया है।

नीति निर्धारण के लिए एक समिति नियुक्त
राज्य सरकार ने इस मामले में नीति निर्धारण के लिए एक समिति नियुक्त की। राज्य में गैर- परिवहन श्रेणी के वाहन बड़े पैमाने पर बढ़ रहे हैं, जिससे यात्रियों की जान को खतरा बना हुआ है। इससे सड़क सुरक्षा के लिए भी चुनौती खड़ी हो गई है। इसलिए, राज्य सरकार ने गैर-परिवहन श्रेणी के तहत पंजीकृत वाहनों को विनियमित करने के लिए एक समिति नियुक्त की है ताकि वे महाराष्ट्र में एग्रीगेटर के रूप में काम कर सकें। समिति ने अध्ययन करने और नियम व शर्तें तय करने के लिए सिफारिश करने का काम किया कि किस बिंदु पर उन्हें अनुमति दी जाए।


