मुंबई (सं. भा.)। अनुशासन के नाम पर दिन रात चाक चौबंद रहने वाले पुलिस वालो कि समस्याएं आज भी जस की तस है। कई दसकों से अपना घर होने कि उम्मीद मे बैठे इन पुलिस वालो को आज तक अपने हक का घर नही मिल पाया है। सरकारी सुस्त कार्यप्रणाली के चलते सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाले इस वर्ग कि अनदेखी से लोगों में सवाल उठ रहा है कि आखिर इनकी सुध सरकार कब लेगी। राज्य में २,२०,००० पुलिस अधिकारी और कर्मचारी है। इनमें से ७८,००० लोगों को घर मुहैया कराया गया है। जबकि १, ४१, ००० पुलिस कर्मचारी और अधिकारी ऐसे हैं को क्वार्टर से वंचित है। इन्हें आज भी घर का इंतजार है।
मुंबई शहर में ५०,००० के लगभग पुलिस अधिकारी और कर्मचारी है, इनमें से २२,००० पुलिस कर्मचारियों को रहने के लिए निवास उपलब्ध है। २८,००० पुलिसवालों के पास रहने के लिए सरकार की तरफ से अब तक मुहैया नहीं कराया गया है। पुलिस के एंटी करप्शन ब्यूरो ने पिछले साल पुलिस विभाग के १, १६७ पुलिसवालों को घूद लेते पकड़ा और उनके पास से अब तक एक करोड़ ८३ लाख रुपए जप्त किया गया। राज्य के सभी नगरपालिका, बेस्ट, पाल्यूशन कंट्रोल बोड, हायर टेक्निकल विभाग, पोर्ट विभाग आदि सरकारी कार्यालयों में एक भी भ्रष्टाचार का मुकदमा २०१९ में दर्ज नहीं किया गया है। राज्य में बीते वर्ष करप्शन विभाग की तरफ से की गई कार्यवाही में सबसे पहला नंबर पुणे का रहा। उसके बाद नासिक, संभाजीनगर, नागपुर, ठाणे, अमरावती नांदेड, मुंबई इन जगह पर एंटी करप्शन ने भष्टाचार के ८९१ मामलों में कार्रवाई की है।


