मुंबई (सं. भा.) । आम लोगों के रहन-सहन के उत्थान तथा शहर को झोपड़पट्टी मुक्त करने के उद्देश्य से बनी एसआर योजना अधिकतर विवादों में फंसी रहती है | नियोजित सोसायटियां, बिल्डर और स्थानिय नेताओं में मनमुटाव व्याप्त रहता है, जिसके चलते विकास कार्य को गति नहीं मिल पा रही है | इसी तरह का एक मामला लगे बैनरों में देखने रहा जहां आम जनता में नेता बटते नजर आ रहे है |

कांदिवली, अभिलाषनगर में रहने वाले सैकड़ो झोपड़ाधारक पिछले कई वर्षो से विस्थापन और विकास के पेंच में फंसे है | उक्त बस्ती में करीब १२०० से १५०० घरों की है जिनका एसआरए के तहत विकास करने की कवायद हो रही है | पोयसर नदी और नाला के होने वाले विकास कार्यों के चलते ३५० रूम टूटने की आशंका बनी हुई है | सबसे बड़ा डर तो उन्हें इस बात का है कि जिस जमीन पर उनके घर मौजूद है वह सरकारी कागजों पर आरक्षित भूखंड है | जिसे कभी भी सरकार अपने कब्जे में लेकर उन्हें कही दूसरी जगह विस्थापित कर सकती है | इस तरह की व्याप्त स्थिति में रहिवासी कही अन्यत्र विस्थापित होने के बदले उक्त जगह पर रहना चाहते है |
यह तभी संभव होगा जब एसआरए प्रकल्प के तहत लोग जाएंगे | कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बात का प्रस्ताव आरपीआई के दिग्गज नेता रामदास आठवले, भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी, विधायक योगेस सागर और नगर सेवक प्रतिभा गिरकर के समक्ष रखा तो वे हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया | बाद में रहिवासियों ने मैत्री और सिया ग्रुप से संपर्क कर एसआरए के तहत काम करने का बात किया | बाद में शिव डेल्टा रहिवासी सेवा संघ (नियोजित) नामक सोसायटी का गठन आगे की ओर कदम बढ़ाया | एसआरए में होने वाली पहली प्रक्रिया सर्वे का शुभारंभ हुआ तो इलाके में हलचल तेज हो गई | बगल के वार्ड के नगर सेवक कमलेश यादव कुछ लोगों के साथ सर्वे रोकने के इरादे से सामने आ खड़े हुए लेकिन प्रतिभा गिरकर के आते ही रफूचक्कर होना पड़ा |
अभिलाषनगर के लोगों में खुशी का ठिकाना उस समय नहीं रहा जब उनके घरों का सर्वे करने वाली सरकारी टीम पंहुची | उस वक्त आलम यह था कि बड़ी संख्या में लोग हाथों में बैनर पोस्टर के साथ कलेक्टर कार्यालय से आये अधिकारीयों का स्वागत किया | जहां बड़ी संख्या में रहिवासी सर्वे का समर्थन में थे वही कुछ लोग विरोध के फिराक में थे | स्थानीय रहिवासियों की एकजुटता और पुलिस प्रशासन के सतर्कता से गरम होता माहौल शांत हो चला और बाद में सर्वे हुआ |
कई स्थानिकों का कहना है कि कमलेश यादव अपना मनपसंद विकासक लाना चाहते थे | इसके अलावा अपने मनमुताबिक सोसायटी के पदाधिकारियों की नियुक्ति चाहते थे | ऐसा न होने के कारण यादव विरोध पर है तथा विधायक योगेश सागर का कान भरा है | गुट बाजी के चलते विधायक योगेश सागर मदद करने के बदले कन्नी काट गए | योगेस सागर और कमलेश यादव को लेकर लोगों में नाराजगी पनपी है | जिसका खुलासा इलाके में लगे बैनरों में दिख रहा है | सर्वे का काम पूरा होने के बाद रहिवासियों ने मददगार नेताओं के प्रति आभार और शाबासी जताने के लिए होर्डिंग लगाया तो उसमें से विधायक योगेश सागर और कमलेश यादव का नाम गायब कर दिए |


