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रिऐक्टिव डामर तकनीक से मुबई की सड़कों को गड्ढा मुक्त करेगी बीएमसी

मुंबई (सं. भा.)  बारिश के दौरान सड़कों पर पड़ने वाले गड्डों की वजह से आलोचना झेलने वाली बीएमसी ने इस बार पहले से ही उससे निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। बीएमसी) ने बारिश से पहले मुंबई की सड़कों को गड्डा मुक्त करने का टार्गेट रखा है। इसके लिए बीएमसी मुंबई के सभी 24 वार्डों को 50- 50 लाख रुपये दे रही है। वहीं सड़कों के बैड पैच और गड्ढे की मरम्मत के लिए मुंबई में 242 करोड़ रुपये का काम शुरू है। इस बार बीएमसी वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के गड्ढे भी भरेगी। पिछले साल बारिश के दौरान सड़कों पर बने गड्डों की वजह से आलोचना झेलने वाली बीएमसी के सामने इस साल बारिश से पहले मुंबई की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने की चुनौती है। बीएमसी इस साल मॉनसून में सड़कों के गड्ढे भरने के लिए रिएक्टिव डामर तकनीक का उपयोग करने जा रही है, जो भारी बारिश में भी गड्डों को भर सकता है। इस तकनीक से गड्ढे भरने के 15 मिनट बाद ही सड़क पर यातायात शुरू किया जा सकेगा। साथ ही रैपिड हार्डनिंग तकनीक का उपयोग भी गड्ढों को भरने के लिए किया जाएगा इसके उपयोग से केवल छह घंटों में पूरी क्षमता से यातायात शुरू किया जा सकेगा।

बीएमसी सड़कों पर पड़ने वाले बैड पैच को भरने पर विशेष जोर देगी। बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि सड़कों पर गड्डे भरने के कुछ समय बाद वहीं और आसपास बड़े पैमाने पर बैड पैच बन जाते हैं। जिससे रोड की हालत और खराब हो जाती हैं। बीएमसी ने ठेकेदारों को बैड पैच और रोड की साइड पट्टी पूरी तरह से भरने का निर्देश दिया है। बता दें कि हर साल बीएमसी वार्डों को बारिश के दौरान गड्ढे भरने के लिए 2-2 करोड़ रुपये देती थी।

आधुनिक तकनीक इस्तेमाल करने का निर्देश

बीएमसी ने इस बार मुंबई में सड़कों के गड्ढे भरने के लिए ठेकेदारों को आधुनिक तकनीक इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है। जिससे कम से कम समय में यातायात शुरू किया जा सके। सड़कों के गड्ढे भरने के लिए रिएक्टिव डामर तकनीक में रसायन और डामर का उपयोग किया जाएगा। रिएक्टिव डामर तकनीक कंक्रीट और अस्फाल्ट को वाहन के टायरों से चिपकने से रोकती है। साथ ही गड्ढे भरने के बाद अगले 15 मिनट के भीतर इस सड़क पर यातायात शुरू किया जा सकता है।

गड्ढे भरने के बाद छह घंटे में वाहन चलाए जा सकेंगे

रैपिड हार्डनिंग तकनीक में गड्डे को भरने के लिए सीमेंट, कंक्रीट जैसी सामग्री और पॉलीमर का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उपयोग बड़े- बड़े गड्ढों को भरने में किया जाता है। इस तकनीक से एक घन मीटर के गड्ढे भरने के लिए 23 हजार रुपये का खर्च आता है। इस प्रकार गड्ढे भरने के बाद केवल छह घंटे में यातायात शुरू होने से वाहन चल सकते हैं। इस तकनीक से गड्ढे भरने से रोड सालों तक मजबूत रहते है।

समय से काम पूरा करने का प्रयास

मुंबई में मॉनसून सक्रिय होने में डेढ़ महीने का समय बचा है, इसलिए बीएमसी ऐसे काम समय से निपटाने के लिए प्रयासरत है। बीएमसी की हद में 2000 किमी से ज्यादा लंबी सड़कें आती हैं। इसमें म्हाडा, एमएमआरडीए, बीपीटी सहित अन्य प्राधिकरणों के अंतर्गत आनेवाली सड़कें भी शामिल हैं। बीएमसी पहली बार वेस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे (माहिम से दहिसर चेकनाका) और ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे (सायन से मुलुंड चेकनाका) के गड्ढे भी इस बार भरेगी।

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