मुंबई (सं. भा.) : मुंबई की आबादी काफी घनी होने के बाद भी बीएमसी अपने स्तर पर मूलभूत सुविधायें उपलब्ध कराने की हर संभव कोशिश में लगी रहती है। पानी भी उनमें से एक है परंतु जरुरत के अनुसार उतना उपलब्ध नही है जीतना की जरुरत है। इसी को ध्यान में रख कर मुंबईकरों के लिए खारे पानी की प्रॉसेसिंग कर इसे पीने योग्य मीठा बनाया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 2000 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की घोषणा बीएमसी कमिश्नर इकबाल सिंह चहल ने की है। यह घोषणा शनिवार को ‘वॉटर फॉर ऑल नीति’ की शुरुआत के मौके पर की गई।
मुंबई में मौजूदा आबादी के अनुसार 4200 मिलियन लीटर पानी की जरूरत है। बीएमसी रोजाना 7 झीलों से 3850 मिलियन लीटर पानी सप्लाई मुंबईकरों को कर रही है। पानी की जरूरतों को देखते हुए बीएमसी ने बीते वर्ष समुद्र के खारे पानी को पीने लायक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया था। बीएमसी कमिश्नर चहल ने बताया कि चेन्नै में फिलहाल समुद्र का पानी को पीने योग्य बनाया जा रहा है। अब मुंबई में भी इस दिशा में काम शुरू किया गया है।
उन्होंने बताया कि उक्त परियोजना के संदर्भ में फिजिबिलिटी स्टडी की गई है और इस पर डीपीआर भी तैयार किया गया है। इस संबंध में जुलाई में टेंडर भी जारी किया जाएगा। इसके अलावा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान को लेकर भी सीएम को जानकारी दी गई है। इसके तहत 7 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट संबंधी वर्क ऑर्डर अगले कुछ दिनों में दिए जा जाएंगे। बीएमसी के इस कार्य की सुप्रीम कोर्ट ने भी सराहना की है।


