- लगभग 50 हजार करोड़ का बजट बिना स्थाई समिति के होगा पेश।
मुंबई (सं. भा.) : बीएमसी 38 साल पहले की गाथा को एक बार फिर से दोहराने जा रही है। बीएमसी कमिश्नर लगभग 50 हजार करोड़ का बजट स्थाई समिति के बिना ही पेश करेंगे।
देश की सबसे समृद्धशाली मुंबई महानगरपालिका का बजट बीएमसी कमिश्नर आई.एस. चहल 2 या 3 फरवरी को पेश कर सकते हैं। बीएमसी के इतिहास में यह 38 साल बाद पहली बर होगा, जब कमिश्नर स्थायी समिति के सामने नहीं बजट पेश करेंगे। क्योंकि बीएमसी आमसभा का कार्यकाल 7 मार्च 2022 को सम्पास हो गया है और अब तक चुनाव नहीं हुआ है।
सबकी नजर BMC बजट पर देश के कई राज्यों से बड़ा बीएमसी का बजट होता है। बीएमसी चुनाव को देखते हुए सभी की निगाह बजट पर टिकी हुई है। खासकर सत्ताधारी ही का जो 25 साल बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना को हटा कर बीएमसी की सत्ता पर काबिज होने का सपना देख रही है। बीएमसी का वर्ष 2022-23 का बजट 4949.21 करोड़ रुपये का था। वर्ष 2023-24 का बजट 50 हजार करोड़ रुपये के जादुई फिगर को पार कर सकता है। बीएमसी सूत्रों के मुताबिक इस बार बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और इन पर विशेष जोर रहेगा। पिछले बजट में स्वास्थ्य विभाग में 1800 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई थी, जिससे स्वास्थ्य बजट बढ़कर 6624 करोड़ रुपये हो गया था। तब कुल बजट का 15 प्रतिशत के लिए आवंटित किया गया था। इसी साल बीएमसी के प्रस्तावित चुनाव के मद्देनजर जनता के लिए सुविधाएं बढ़ाने पर और देखने को मिल सकता है।
BMC में प्रशासक का इतिहास
कमिश्नर आई एस चहल बीएमसी के इतिहास के तीसरे प्रशासक हैं। इसके पहले अप्रैल, 1984 में डी. एम. सुखटणकर बीएमसी के पहले प्रशासक नियुक्त हुए थे। उसके बाद 12 नवंबर, 1984 से 9 मई, 1985 तक जे. जी. कांगा बीएमसी के प्रशासक थे। 7 मार्च, 2022 को बीएमसी का कार्यकाल खत्म होने के बाद से चहल प्रशासक की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वर्ष 1990 से 1992 तक महिला आरक्षण के मुद्दे पर बिना चुनाव बीएमसी का कार्यकाल दो साल के लिए बढ़ाया गया था। तब स्थायी समिति सहित मेयर व अन्य समितियां भी थी। उस दौरान कमिश्नर ने स्थायी समिति अध्यक्ष के सामने बजट पेश किया था।

चहल करेंगे पेश, चहल ही स्वीकारेंगे!
वर्ष 1985 में जे.जी.कांगा ने कमिश्नर एवं प्रशासक रहते हुए आखिरी बार बीएमसी का बजट पेश किया था। हालांकि, बीएमसी के पास यह रिकॉर्ड नहीं है कि तब कमिश्नर रहते हुए कांगा ने बजट किसे पेश किया था। इसीलिए बीएमसी प्रशासन इस साल अब तक तय नहीं कर पाया है कि बजट चहल पेश करेंगे या शिक्षा बजट की तरह अतिरिक्त आयुक्त यह जिम्मेदारी निभाएगा और प्रशासक के रूप में चहल बजट को स्वीकार करेंगे। बीएमसी नियम के अनुसार 15 फरवरी से पहले बजट पेश किया जाना जरूरी है। इस बार बीएमसी बजट पेश करने में संवैधानिक संकट है। बीएमसी अधिकारियों के बीच चर्चा है कि क्या इस बार बीएमसी का बजट चहल ही पेश करेंगे और चहल ही स्वीकार करेंगे। इसको लेकर कमिश्नर से लेकर अन्य बड़े अधिकारी पशोपेश में पड़े हैं। एक अधिकारी ने बताया कि कमिश्नर के रूप में चहल बजट सामने रख कर प्रशासक के रूप में स्वीकार कर सकते है। इसके लिए जैसे प्रस्ताव का मसौदा मंजूर होता है, वही प्रक्रिया अपनानी पड़ेगी। इसके अलावा एक विकल्प और भी है। जिस तरह बीएमसी का शिक्षा बजट अतिरिक्त आयुक्त पेश करता है, उसी तरह आयुक्त अश्विनी भिडे या पी. वेलरासू भी पेश कर सकते हैं। बजट पेश करने को लेकर कमिश्नर जल्द ही बोएमसी की लीगल टीम से सलाह-मशविरा करेगे, उसके बाद अंतिम फैसला लेंगे।


