मुंबई (सं. भा.) : बॉम्बे हाई कोर्ट ने संबंधित अथॉरिटी को निर्देश दिया है कि दूसरे राज्यों से महाराष्ट्र में आने वाली स्लीपर और डबल डेकर बसों की जांच की जाए। यह आदेश बसों के डायमेंशन और स्ट्रक्चर से जुड़े नियमों के उल्लंघन के चलते दिया गया है। राज्य में इन बसों के संचालन पर रोक लगाने के खिलाफ 72 लोगों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि अधिकारी मोटर व्हीकल एक्ट के नियम 93 और 128 के नाम पर कार्रवाई कर रहे हैं, जो बसों की लंबाई, चौड़ाई और स्ट्रक्चर से संबंधित हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि केंद्रीय सड़क परिवहन और हाईवे मंत्रालय द्वारा 16 मार्च 2021 को जारी निर्देश केवल 26 जून 2020 के बाद निर्मित बसों पर लागू होते हैं, जबकि उनकी बसें इससे पहले की बनी हुई हैं। इसलिए, उन पर यह नियम लागू नहीं होना चाहिए और उनकी बसों को ब्लैकलिस्ट नहीं किया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं की बसों की जांच आवश्यक है। इस पर जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच ने कहा कि सरकार का तर्क सही हो सकता है, लेकिन याचिकाकर्ताओं की दलीलों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने न्यायहित में याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे दो हफ्ते के भीतर बसों की जांच के लिए संबंधित आरटीओ ऑफिस में आवेदन करें।
बेंच ने आरटीओ को आदेश दिया कि वह दस्तावेजों के आधार पर यह निर्धारित करे कि मोटर व्हीकल एक्ट के नियम 93 और 128 (सुधारित) याचिकाकर्ताओं की बसों पर लागू होते हैं या नहीं। याचिकाकर्ताओं को अपनी बसों की जांच के लिए आरटीओ कार्यालय में पेश करने को कहा गया है।


