spot_img
Homeमुंबईस्त्रियों से समझें चार दिवारी में बंद होना क्या होता है।

स्त्रियों से समझें चार दिवारी में बंद होना क्या होता है।

कोरोनावायरस जिसके नाम ओर पहचान से आज हम ही नहीं हमारे बच्चे भी वाकिफ हो चूके हैं। जिसकी वजह उसका फैलता खौफ रहा है। कोरोनावायरस ने आज हमारी पूरी दुनिया को इस तरह से डरा दिया है कि हमें अपने काम-धंधे इत्यादि सब कुछ बंद कर के घरों में रहना पड़ रहा है।

जिसकी वज़ह से आर्थिक नुकसान तो हम सभी झेल ही रहें हैं। साथ ही घर में रहना एक सज़ा की तरह अनुभव करने लगें है‌। हमारे प्रधानमंत्री द्वारा देश हित में 21 दिन का लॉक डाउन घोषित किया गया, जिसका हम सभी पालन करने की कोशिश तो कर रहें हैं। किन्तु इस बात की खुशी हम में से बहुत ही कम लोगों को हो रही है।

लॉक डाउन घोषित होने के अगले दिन से ही हमारे द्वारा घर में रहने को लेकर शिकायत होने लगी। बहुत से लोगों का मानना था कि यह हमारे साथ गलत है हमारे अधिकारों का हनन है। तो कई महान अनुभवी लोगों की राय थी यह सब सरकार इस लिए कर रही है ताकि वह  आपात काल घोषित कर सकें और अपने अनुसार देश को चला सकें।

हमारी सोच की कोई सीमा नहीं है। हम जो चाहे सोच सकते हैं और बोल सकते हैं हमें रोकने वाला कोई नहीं है। किन्तु यदि हम कुछ भी बोलने से पहले यह समझने का प्रयास करेंगे कि देश इस वक्त कितनी बड़ी परेशानी में हैं और उसे हमारी जरूरत है। तो हम आज एक अच्छे देश वासी बनकर देश के प्रति अपना कर्तव्य निभा सकते हैं।

मेरे प्यारे साथियों यदि आप को घरों में रहने में परेशानी हो रही है और आप को ऐसा लगता है। कि यह आप के साथ गलत है। तो उन स्त्रियों के बारे में सोचें जिन्हें हमने रीति-रिवाजों, संस्कार की बेड़ियों में सेकंडों सालों से अपने घरों की चार दिवारी में कैद रखा है। आप के लिए जिस घर में  21 दिन रहना मुश्किल हो रहा है। उसी घर में उन्हीं दीवारों के कोनों में पूरा जीवन जीने वालीं आपकी मां, बहन, बेटी, दादी, जैसी बहुत सी स्त्रियां कैसे रहतीं आईं हैं। बिना शोर के कोई शिकवा, कोई शिकायत किए बिन, सब सहती रही। बस अपनों की खुशी के लिए।

आज हम उनके द्वारा गुजारें जा रहें चार दिवारी में कैद जीवन को स्वयं जी रहें है। आस-पास क्या हो रहा है हम इस से परिचित हैं प्रत्येक समय। किन्तु वह तो यह सब भी नहीं जान पातीं थीं। कैसा जीवन जीती आईं हैं हमारे ही अपने घरों में। हमारे ही देश की आधी आबादी। यह अब आप कुछ-कुछ समझने लगे होंगे। किन्तु ऐसा नहीं समझें कि यह एक गुजरी हुई बात हो गई है और अब हमारे यहां हमारे घरों में ऐसा नहीं होता है।

आप के पास अभी बहुत समय है एक बार सोच कर देखे आप की मां दादी कितनी बार घर से बाहर जाती है। उन्होंने अपने जीवन में कितनी बार जा कर अपनी सहेली या अकेले जा कर अपने जीवन का आनंद लिया है। कितनी बार उन्होंने रसोई से छुट्टी ले कर घर की चारदीवारी से बाहर जाने की बात की है। यह कहते हुए कि यह मेरे अधिकारों का हनन है। मेरा घर में रहने पर दम घुटता है।

यदि हमारे यहां की स्त्रियां अपना सम्पूर्ण जीवन दान कर सकतीं है। अपनों की खुशी के लिए। तो क्या हम अपने जीवन के चंद दिन घरों में रह कर अपनों के जीवन की सुरक्षा में सहयोग नहीं दे सकते है।  स्वार्थी हो कर देश के लिए मुश्किल बढ़ा कर देश को शर्मसार ना करें। सब की फ़िक्र करें उनके लिए अपना कर्तव्य निभाए।

          ‌‌‌‌‌‌      राखी सरोज

RELATED ARTICLES

Most Popular

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com