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संदिग्ध ईंधन कारोबार पर शिकंजा, कलेक्टर और पुलिस करेंगे निगरानी

मुंबई, (सं.भा.) राज्य में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती खपत तथा ईंधन की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार ने निगरानी और जांच व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है। ईंधन की जमाखोरी, अवैध भंडारण, कालाबाजारी और खुदरा पेट्रोल पंपों से बड़े पैमाने पर की जा रही संदिग्ध खरीद पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन, आपूर्ति विभाग और पुलिस को विशेष अधिकार दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में ईंधन का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और नागरिकों को घबराकर अतिरिक्त खरीदारी करने की जरूरत नहीं है।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन, भंडारण और बिक्री से जुड़ी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी। अधिकारियों को टैंकरों, बाउजरों और पेट्रोल पंपों की गतिविधियों की जांच करने तथा किसी भी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य सरकार के अनुसार हाल के महीनों में पेट्रोल और डीजल की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मई 2026 में पिछले वर्ष की तुलना में पेट्रोल की मांग में 18.54 प्रतिशत और डीजल की मांग में 22.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। वहीं बल्क डीजल की बिक्री में कमी आई है, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि कुछ औद्योगिक उपभोक्ता खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद रहे हैं।

सरकार ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि सभी पेट्रोल पंपों की दैनिक बिक्री पर नजर रखी जाए। जहां बिक्री में अचानक असामान्य वृद्धि दिखाई दे, वहां तुरंत जांच की जाए। इसके अलावा ड्रम, बैरल अथवा अन्य कंटेनरों में बार-बार ईंधन भरवाने वाले वाहनों की भी निगरानी की जाएगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोलियम पदार्थों की अवैध खरीद-बिक्री, जमाखोरी और कालाबाजारी कानूनन अपराध हैं। ऐसे मामलों में विभागीय आयुक्त, जिलाधिकारी, जिला आपूर्ति अधिकारी, तहसीलदार तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को कार्रवाई का अधिकार दिया गया है।

निर्देशों में कहा गया है कि जिन औद्योगिक और व्यावसायिक संस्थानों को बड़ी मात्रा में पेट्रोल या डीजल की आवश्यकता होती है, उन्हें सीधे तेल विपणन कंपनियों से ईंधन खरीदना होगा। यदि कोई थोक उपभोक्ता खुदरा पेट्रोल पंप से ईंधन खरीदता पाया गया तो उसके साथ संबंधित पेट्रोल पंप संचालक के खिलाफ भी आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

सरकार ने जिला प्रशासन को इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के अधिकारियों के साथ नियमित समन्वय बनाए रखने और आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जांच, जब्ती और की गई कार्रवाई का पूरा विवरण प्रतिदिन ऑनलाइन प्रणाली में दर्ज करने को कहा गया है, ताकि राज्यभर में ईंधन आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए।

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